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“तुम ही हो”
“तुम ही हो”

“तुम ही हो”

मुलाक़ात दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली मेट्रो हमेशा की तरह लोगों से भरी हुई थी। हर कोई अपनी-अपनी मंज़िल की तरफ़ भाग रहा था। आयुष भी उन्हीं में से एक था। एक हाथ में बैग और दूसरे में मोबाइल, आँखें बस ...

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Chapters

1.

“तुम ही हो”

46 5 6 मिनट
04 सितम्बर 2025
2.

पहली बात

39 5 7 मिनट
04 सितम्बर 2025
3.

धड़कनों की खामोशी

28 5 9 मिनट
05 सितम्बर 2025
4.

रिश्तों की कसक

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5.

बारिश के बाद की खामोशी

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6.

रिश्ता और रुकावटें

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7.

आमना-सामना

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8.

पहचान की जंग

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9.

पहचान की जंग

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10.

असली चुनौती

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11.

असली साज़िश

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12.

परछाइयों का सच

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13.

चेहरे के पीछे का चेहरा

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14.

टकराव

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15.

साज़िश का जाल

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16.

वार और पलटवार

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17.

साज़िश का जाल

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18.

सच और झूठ की लड़ाई

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19.

रिश्तों की गहराई

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20.

सच्चाई की परछाइयाँ

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