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श्रीमती जी
श्रीमती जी

श्रीमती जी

सुबह -सुबह श्रीमतीजी की सुमधुर आवाज कान मे पड़ी,"पूरे दिन मैं ही खटती रहूँ,बाकी सब खराटे भर सोते रहे। नाश्ता बनाऊं,खाना बनाऊ,झाडू पोछा करूँ ,बरतन साफ करूँ।मेरी जिन्दगी तो नौकररानी से भी बेकार हो ...

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1.

श्रीमती जी

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17 जनवरी 2021