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पराधीन सपनेहु सुख नाही,
पराधीन सपनेहु सुख नाही,

पराधीन सपनेहु सुख नाही,

दिनाँक - 16 जनवरी 2022 पराधीन सपनेहु सुख नाही, सोच विचार देख मन माही।। यह  उक्ति तुलसीदास जी के द्वारा रामायण की चौपाई में  लिखी गई है --- जिसका अर्थ है जो व्यक्ति पराधीन या परावलंबी होता है  वह ...

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Chapters

1.

पराधीन सपनेहु सुख नाही,

30 5 1 நிமிடம்
15 ஜனவரி 2022
2.

"संजोए -प्रकृति के उपहार"

10 5 1 நிமிடம்
29 ஜனவரி 2022
3.

आजादी का महोत्सव

4 5 3 நிமிடங்கள்
29 ஜனவரி 2022
4.

कही_ अनकही

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