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निर्मोही  अनजान  हमसफ़र
निर्मोही  अनजान  हमसफ़र

निर्मोही अनजान हमसफ़र

पुरुष विशेष

"एक ऐसी शादी… जो ना कभी सपनों में सोची गई… ना कभी चाही गई…" बारिश की वो अंधेरी रात…हर बिजली की चमक के साथ उसका दिल और तेज़ धड़क रहा था… एक साधारण लड़की…जिसकी ज़िंदगी बस अपने छोटे-छोटे ख्वाबों में ...

4.9
(311)
6 घंटे
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Chapters

1.

निर्मोही अनजान हमसफ़र

581 5 1 मिनट
27 मार्च 2026
2.

“गलती…?”

431 5 5 मिनट
27 मार्च 2026
3.

“हम फिर मिलेंगे…”

355 5 6 मिनट
27 मार्च 2026
4.

“तुम्हारी बहन ने… बहुत अच्छा फैसला लिया है…”

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5.

हर्ष ठाकुर

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6.

“अब तुम मेरी हो…”

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7.

“जिंदगी ऐसे ही अचानक बदलती है… इसी को जिंदगी कहते हैं…”

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8.

ठाकुर परिवार में गृह प्रवेश

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9.

“हर्ष! ये किसे उठाकर ले आए हो…?

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10.

“ये… ये आप क्या कर रहे हैं…?”

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11.

चित्रा वसुधा को लेकर चली गई

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12.

वसुधा को लेकर गया हर्ष

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13.

मीरा नहीं रही

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14.

“आप हमें छोड़कर क्यों चली गई…”

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15.

वर्धन ने संध्या को बदुआ दिया

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16.

“अब इन्हें गंगा में प्रवाहित कीजिए…”

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17.

“मेरी पत्नी पर हाथ उठाने की हिम्मत कैसे हुई…?”

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18.

"पैर चलने लायक नहीं रखेंगे "

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19.

“अब यही मेरा घर है…”

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20.

मजबूरी

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