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“मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम”
“मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम”

“मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम”

फैमिली ड्रामा
प्रतिलिपि क्रिएटर्स लेखन चैलेंज - 5

यह कहानी वफ़ा और बेवफ़ाई की है वफ़ा इतनी कि आशिक़ को मजनूँ बना दे, और बेवफ़ाई इतनी कि दुनिया की रंगीनियों में खोकर एक ग़लत फ़ैसला… और फिर उसी फ़ैसले का अंजाम बन जाए। यह कहानी किसी एक लड़की की ...

16 मिनट
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Chapters

1.

“मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम”

22 5 7 मिनट
10 जनवरी 2026
2.

टूटता हुआ सब्र और बग़ावत۔ 2 मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम

11 5 3 मिनट
11 जनवरी 2026
3.

भूली हुई पहचान۔ 3 मैं ही ज़ालिम, मैं ही मज़लूम

3 5 1 मिनट
12 जनवरी 2026