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महशर अफ़रीदी
महशर अफ़रीदी

महशर अफ़रीदी

गम की दौलत मुफ्त लुटा दूं…. बिल्कुल नहीं! अश्कों में ये दर्द बहा दूं…..बिल्कुल नहीं! तूने तो औकात दिखा दी है अपनी मैं अपना मयार गिरा दूं… बिल्कुल नहीं! एक नजूमी सबको ख्वाब दिखाता है. मैं भी अपना ...

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Chapters

1.

गम की दौलत मुफ्त लुटा दूं…. बिल्कुल नहीं!

17 5 1 मिनट
22 नवम्बर 2022
2.

हर अन्धेरा रौशनी में लग गया

13 5 1 मिनट
23 नवम्बर 2022
3.

इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाए

12 5 1 मिनट
24 नवम्बर 2022
4.

इश्क में दान करना पड़ता है

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5.

बगैर उसको बताये निभाना पड़ता है

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6.

हवा के चलते ही बादल का साफ़ हो जाना

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