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"कोहरे में चाँद. "
"कोहरे में चाँद. "

"कोहरे में चाँद. "

मेरी बात ..लघु  कविता          " ..कोहरे में चाँद ..." चाँद अब कम दिखता है. सीमेंट  के बढ़ते  जंगल हैँ.     बात जोटते  पल पल हैँ..     ना तू आता  ना दिखता है.. आसमान भी धुंधला सा है. बदरी  ...

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"कोहरे में चाँद. "

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04 दिसम्बर 2020