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आँशु कविता
आँशु कविता

आँशु कविता

खामोश है पर बहती है। चुप रह कर भी सब कहती है। ना कोई रुप है ना कोई रंग है। ना है कोई आकर ही। खामोश है पर बहती है। चुप रह कर भी सब कहती है।। अभी ना रोको अभी ना टोको। अभी तो बसी है ये आँखों ...

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आँशु कविता

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16 नवम्बर 2021