pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

अंतर्भाव (लेखकीय)

4.9
154

अन्तर्भाव                                   पवन कुमार यादव                               प्रस्तावना अक्सर हम जीवन के किसी ऐसे दोराहे पर फँस जाते हैं जहाँ पर निर्णय लेने और न लेने से अपनी ही हानि ...

अभी पढ़ें
अंतर्भाव भाग - १
पुस्तक का अगला भाग यहाँ पढ़ें अंतर्भाव भाग - १
Pavan Kumar Yadav

युवावस्था जीवन का वो समयान्तराल होता है जिस के इंतजार में बच्चे बड़े होते हैं और बड़े इसकी यादों में डूब कर जीवन गुजार देते हैं। प्रत्येक व्यक्ति इस दौर के सभी चित्रों को अपने कल्पनात्मक महल की ...

लेखक के बारे में
author
Pavan Kumar Yadav

मुझे इंस्टाग्राम पर फालो करें। https://www.instagram.com/pavanyaduraj/ [email protected]

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Satish Yadav
    06 दिसम्बर 2021
    अंतर्मन,भावनाओ वेदना संवेदना के समन्वय पर लिखी प्रेरणास्पद रचना,वधाई💌🙏
  • author
    23 मार्च 2021
    बहुत ही बढ़िया ढंग से आपने कहानी को लिखा। आगे भी लिखते रहें ,ताकि अच्छी प्रेम कहानियां हमे पढ़ने को मिले।
  • author
    Madhu Sethi
    23 मार्च 2021
    आपकी कहानी का प्रस्तुतिकरण बढ़िया ,भाव अभिव्यक्ति सुंदर लेकिन एक प्रार्थना है लाइनों और शब्दों में थोड़ा गैप दो🙏🙏
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Satish Yadav
    06 दिसम्बर 2021
    अंतर्मन,भावनाओ वेदना संवेदना के समन्वय पर लिखी प्रेरणास्पद रचना,वधाई💌🙏
  • author
    23 मार्च 2021
    बहुत ही बढ़िया ढंग से आपने कहानी को लिखा। आगे भी लिखते रहें ,ताकि अच्छी प्रेम कहानियां हमे पढ़ने को मिले।
  • author
    Madhu Sethi
    23 मार्च 2021
    आपकी कहानी का प्रस्तुतिकरण बढ़िया ,भाव अभिव्यक्ति सुंदर लेकिन एक प्रार्थना है लाइनों और शब्दों में थोड़ा गैप दो🙏🙏