
प्रतिलिपिरात के साढ़े ग्यारह बजे, जब जयपुर की राठौर हवेली मरुस्थल की चाँदनी में सो रही थी, दिल्ली के एक गगनचुंबी टॉवर में दो लोग अभी भी काम में डूबे थे—सूरज राठौर और उसका वफादार पर्सनल असिस्टेंट, कार्तिक। सूरज का लगभग हमउम्र कार्तिक सिर्फ उसका पर्सनल असिस्टेंट ही नहीं था बल्कि दोनों के बीच का रिश्ता थोड़ा अलग था। दोनों गहरे दोस्त तो नहीं थे पर कार्तिक सूरज से निजी बातें भी कर लेता था लेकिन उसका मूड देखकर। एक कार्तिक ही था जिससे सूरज इतनी बातें कर लेता था वरना तो वह बस अपने काम में ही डूबा रहता था. अपने ...
रिपोर्ट की समस्या
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