ट्रेन धड़धड़ाती हुई चली जा रही थी। बाहर अँधेरा हो चुका था। वो बोगी लगभग खाली थी। ज्यादा यात्री नहीं थे उसमें।उसने घड़ी देखी तो रात के नौ बज रहे थे। अब तक तो उसे घर पहुंचे दो घंटे हो गए होते। पर ...
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मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया-मुर्दों की ट्रेन-1
वर्षा
4.8
ट्रेन अपनी रफ्तार से चली जा रही थी। वो अलसाई सी एक खिड़की के पास सर टिकाए बैठी हुई थी। उसे हमेशा ही ट्रेन का सफर उबाऊ लगता था। मगर क्या करें जहाँ वह जा रही थी वहाँ तक ट्रेन से ही पहुँचा जा सकता ...
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पूरे 6 भाग है इस कहानी के। और वर्षा जी खास आपसे कहना चाहता हूं कि अंधेरे कमरे में पढ़ते पढ़ते मुझे एक समय ऐसे लगा कि एक यात्री उस ट्रेन का मेरे कंधे पे हाथ रखने वाला है। बढ़िया लेखन, और वर्णन।
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पूरे 6 भाग है इस कहानी के। और वर्षा जी खास आपसे कहना चाहता हूं कि अंधेरे कमरे में पढ़ते पढ़ते मुझे एक समय ऐसे लगा कि एक यात्री उस ट्रेन का मेरे कंधे पे हाथ रखने वाला है। बढ़िया लेखन, और वर्णन।
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बधाई हो! मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया-मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।
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