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शायरी 'हक'

4.9
204

रुठे हो हमसे आप, हम जानते हैं। लेकिन आपको हम, अपना मानते हैं। हम से दूर नहीं रह सकतीं आप, हम यह भी जानते हैं। इसलिए आपकी नाराजगी पर भी, हम हक अपना मानते हैं। आप सभी पाठकों का बहुत आभार। धन्यवाद। ...

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शायरी 'गैर'
शायरी 'गैर'
गौरव गुप्ता
4.8
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लेखक के बारे में
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गौरव गुप्ता

"खामियां मुझमें भी हैं, शायद सब में जान ना सकूं। इसलिए ढूंढ़ता रहता हूं, अच्छे दोस्त जमाने में। अगर दिख जाए कमी मुझमें कोई, तो अपना समझकर बता देना। संकोच मत करना, मुझे मेरी हकीकत बताने में। वैसे तो बहुत मिल जाएंगे, मुंह पर अच्छा बोलने वाले। लेकिन मैं सच्चे मोतियों को, रखना चाहता हूं अपने खजाने में।" सच्ची लगन और नेक निष्ठा, लक्ष्य प्राप्ति के श्रेष्ठ साधन हैं।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vinay Sinha
    09 मई 2021
    nice one
  • author
    Mamta Singh
    09 मई 2021
    awesome part 👌👌👌👌
  • author
    Anita Jain "Anita Jain"
    09 मई 2021
    super fantastic 👌👌👌👌👍👍
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  • author
    Vinay Sinha
    09 मई 2021
    nice one
  • author
    Mamta Singh
    09 मई 2021
    awesome part 👌👌👌👌
  • author
    Anita Jain "Anita Jain"
    09 मई 2021
    super fantastic 👌👌👌👌👍👍