नारी तू नारायणी! है कर्तव्य परायणी। अश्रुओं में सिक्त है, कितने सुखों से रिक्त है, फिर भी है सुखदायनी, नारी तू नारायणी! है त्याग की प्रतिमूर्ति, नित परोद्देश्य की पूर्ति, तुझ पर लिखी " कामायनी" नारी ...
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जानते हो तुम उसे...
आद्य 'शक्ति' "आद्या"
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शीश वसुधा के सजाया जिसने हिमालय ताज है, जानते हो तुम उसे या ये कि कोई राज़ है? विश्व के सब प्राणियों में जिसने भरी आवाज़ है जानते हो तुम उसे या ये कि कोई राज़ है? कल है जिसके हाथों में, हाथों में ...
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