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नाग महल :एक रहस्यमयी प्रेम कहानी भाग 2

4.7
16932

विजयवाड़ा में खड़ा ये नाग महल आज भी अपने असली हक़दार का इंतज़ार कर रहा है... आज भी इस महल की एक एक ईंट अपने वारिस के इंतज़ार में ज्यों की त्यों ही बनी हुई है... आज भी ये महल अपने उसी शान उसी रुतबे से ...

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नाग महल :एक रहस्यमयी प्रेम कहानी भाग 3
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Danish Ansari "तरन"
4.7

तेज़ तूफानी हवाएं थम चुकी हैं.... मगर बिजली की कड़क रुकने का नाम ही नहीं ले रही... वो अमावस की काली रात एक काला गहरा तिमिर बन चुकी है..... गुरुदेव और सपेरा... अपनी अपनी आँखें मसलते हुए नाग महल के ...

लेखक के बारे में
author
Danish Ansari

ALHAMDULILLAH 😊 Never ever dare to copy my stories.. All are secured under copyright law पढ़िए "नाग महल :एक अलौकिक प्रेम कहानी" के दिलचस्प और अनोखे अध्याय..... Life is too short... So we should make our journey historical ... Rucks do worldly things... But an author always thinks beyond society... It means whatsoever content i create thats all are my mindset😊.... Up-78

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dr Govind Pandey
    26 सितम्बर 2022
    एकदम बेसिरपैर की सर्वथा बकवास कहानी है जी । लगभग हर अंक में एक नया किरदार जुड़ता है । नए नए विलेन भी जुड़ते रहते है । भगवान सदा शिव जी को एक निहायत ही असहाय और निरुपाय शक्ति बना कर दिखा दिया । मानव लोक , नागलोक , और गरुण लोक और उसके निवासियों को मनमाने ढंग से अपनी बेसिरपैर की कल्पनाओं से अजीब ढंग का बना दिया । कहानी का कभी कोई पात्र मानव रहता है तो कभी अगले पार्ट में वह नाग हो जाता है । तो कभी गरुड़ पलास हो जाता है । है न अनोखी कल्पना । मैथुनी सृष्टि में एक गरुड़ पलास का जन्म तथाकथित एक नागरानी के पहले छोड़े हुए केंचुली के स्वयं जल जाने और उसी की राख से होता है । है न अद्भुत कपोल कल्पना ? औऱ तो और भगवान शिव उसी गरुण से प्रसन्न होकर उसे एक इच्छाधारी नाग में बदल देते है ! है न यह भी एक अद्भुत कपोल कल्पना ! अब बकरी के ऊपर भगवान शिव प्रसन्न हो जाये तो उसे मनुष्य बना दें ? भगवान न हुए , एक मजाक हो गए ? अपनी ही सृष्टि के बनाये हुए नियमों को बदल देने वाले एक मसखरे ? सम्पूर्ण सृष्टि में एक योनि के जीव को बिना जन्म लिए दूसरे जीव में बदल देने वाले एक महा मूर्ख मसखरे जैसे अद्भुत पावर ? ! कितनी बीभत्स और बेकार की कपोल कल्पना है जी ? यह लेखक महोदय के अत्यंत उज्ज्वल मस्तिष्क की बेहूदी सी अनोखी और सर्वथा बेकार और बकवास , निहायत ही कूड़ा करकट वाली कपोल कल्पना है जी ! नायक नायिका का पालन पोषण करने वाले पात्र कभी उसके मानवीय मां बाप होते है तो अगले भाग में नाग लोक के वासी और कभी हिजड़े के रूप में विलेन । धन्य है यह अजीब सी और अनोखी कपोल कल्पना ? कहानी क्या है और किस दिशा में जा रही है किसी को कोई भी अंदाजा ही नही लगता है ! लेखक को सनातन धर्म के नाग लोक , गन्धर्व लोक , गरुण लोक , शिव लोक जैसे दिव्य लोको की तनिक भी जानकारी नही है । न ही इन लोको के निवासियों की शक्तियों के बारे में कोई जानकारी है जी । पहले इन लोको के बारे में अध्ययन कर लेने के बाद इस रचना को लिखते तो ज्यादा सुन्दर रचना बनती । अपनी बेसिरपैर की अजीबोगरीब और सर्वथा बकवास कपोल कल्पना से यह निहायत ही एक कूड़ा करकट जैसी रचना बन गयी है जी । नागराज को आतिश जैसा मुसलमानी नाम दे दिया । जबकि कोई भी हिन्दू माता पिता अपनी सन्तान का नाम मुसलमानी नाम नही रखते है । लेखक महोदय मुस्लिम धर्म के है और उन्हें सनातन धर्म की कोई भी समझ नही है । कृपया अपने ही धर्म से सम्बंधित जिन्न और परी जैसी मिथक कथाओ पर अपनी सर्वथा बकवास और निरर्थक कपोल कल्पना का उपयोग करते तो कोई ठीक ठाक रचना बन सकती थी । शिवि और गौरी दोनो को ही अलग अलग भागो में नागरानी का सम्बोधन मिल रहा है । जबकि कहानी की नायिका वही है । उसी के इर्दगिर्द कहानी घूमती है । ऐसी बेसिरपैर की सर्वथा बकवास कहानी पूरी प्रतिलिपि पर अभी तक पढ़ने में नही आई जी । लेखक को नाग लोक , गरुण लोक जैसे दिव्य लोको की कोई भी गहरी समझ नही है । बस फिल्मी मसाला की तरह जो भी उटपटांग कपोल कल्पनाएं लेखक महोदय के मस्तिष्क में आती गयी बस उसे उसे जोडते चले गए । मिला जुला कर यह एक मनोरंजक मसाला कथा बन गयी है जिससे मनोरंजन तो होता है लेकिन यह सब कमियां भी दृष्टिगोचर होती है । पूरा का पूरा भाग एक ही बार मे पढ़ तो गए किन्तु पढ़ कर बहुत ही निराश हुए । एकदम हास्यास्पद रचना लगी । कुछ भी सिलसिलेवार ढंग का नही लगा । कहानी का कोई भी पात्र सही ढंग से कहानी में कहीं भी फिट नही बैठा । जब मन किया तो किसी को मानवीय रूप में दिखाया और उसी पात्र को जब मन किया तो कभी नाग के रूप में तो कभी गरुड़ के रूप में ? सबसे मजेदार बात यह लगी कि दाई मां , शुचि , हिजड़ा मा , रुक्मणी ये सब सात सौ वर्षों से जीवित है । हिजड़ा मां तो पुरुष रूप में भैरव होकर हिजड़ा क्यो है यह स्पष्ट नही हुआ ? शैल का अगर पुनर्जन्म हुआ तो उसके अपने पिछले नाग जन्म की याद कैसे आ गयी ? शैल पूरे जीवन पति सम्भोग के बगैर तीन महीने में ही दो जुड़वाँ सन्तान को जन्म दे देती है ? वाकई अनोखी कपोल कल्पना है । जबकि मानवीय रूप में कोई भी देव शक्ति इस पृथ्वी पर अवतरित होती है तब उसे भी इस मृत्युलोक के मानवीय नियमो को मानना पड़ता है । दुनिया के किसी भी धर्म सम्प्रदाय के पीर पैगम्बर , साधु महात्मा , ईश्वरीय अवतार जब मानव रूप में जन्म लेते है तब उनके जन्म की प्रक्रिया एक मानव की तरह ही होती है । जबकि यहाँ बिना पति सम्भोग के ही एक गुड़हल का फूल खाकर शैल तीन महीनों में ही दो बच्चियों को जन्म दे देती है । क्या अजीब सी बेकार और बकवास कपोल कल्पना है जी ? ! एकदम बेकार और सर्वथा बकवास रचना । बेसिरपैर की बकवास कपोल कल्पना ।
  • author
    Anuradha Vishwakarma
    03 अक्टूबर 2021
    bahut hi aascharya aur achambhe ki bat h 3month two baby Radhe Radhe
  • author
    Sri nidhi "Shankar"
    30 सितम्बर 2022
    suruat to kaffi suspense bhara hua hai 👍👍👍👍👍👍
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  • author
    Dr Govind Pandey
    26 सितम्बर 2022
    एकदम बेसिरपैर की सर्वथा बकवास कहानी है जी । लगभग हर अंक में एक नया किरदार जुड़ता है । नए नए विलेन भी जुड़ते रहते है । भगवान सदा शिव जी को एक निहायत ही असहाय और निरुपाय शक्ति बना कर दिखा दिया । मानव लोक , नागलोक , और गरुण लोक और उसके निवासियों को मनमाने ढंग से अपनी बेसिरपैर की कल्पनाओं से अजीब ढंग का बना दिया । कहानी का कभी कोई पात्र मानव रहता है तो कभी अगले पार्ट में वह नाग हो जाता है । तो कभी गरुड़ पलास हो जाता है । है न अनोखी कल्पना । मैथुनी सृष्टि में एक गरुड़ पलास का जन्म तथाकथित एक नागरानी के पहले छोड़े हुए केंचुली के स्वयं जल जाने और उसी की राख से होता है । है न अद्भुत कपोल कल्पना ? औऱ तो और भगवान शिव उसी गरुण से प्रसन्न होकर उसे एक इच्छाधारी नाग में बदल देते है ! है न यह भी एक अद्भुत कपोल कल्पना ! अब बकरी के ऊपर भगवान शिव प्रसन्न हो जाये तो उसे मनुष्य बना दें ? भगवान न हुए , एक मजाक हो गए ? अपनी ही सृष्टि के बनाये हुए नियमों को बदल देने वाले एक मसखरे ? सम्पूर्ण सृष्टि में एक योनि के जीव को बिना जन्म लिए दूसरे जीव में बदल देने वाले एक महा मूर्ख मसखरे जैसे अद्भुत पावर ? ! कितनी बीभत्स और बेकार की कपोल कल्पना है जी ? यह लेखक महोदय के अत्यंत उज्ज्वल मस्तिष्क की बेहूदी सी अनोखी और सर्वथा बेकार और बकवास , निहायत ही कूड़ा करकट वाली कपोल कल्पना है जी ! नायक नायिका का पालन पोषण करने वाले पात्र कभी उसके मानवीय मां बाप होते है तो अगले भाग में नाग लोक के वासी और कभी हिजड़े के रूप में विलेन । धन्य है यह अजीब सी और अनोखी कपोल कल्पना ? कहानी क्या है और किस दिशा में जा रही है किसी को कोई भी अंदाजा ही नही लगता है ! लेखक को सनातन धर्म के नाग लोक , गन्धर्व लोक , गरुण लोक , शिव लोक जैसे दिव्य लोको की तनिक भी जानकारी नही है । न ही इन लोको के निवासियों की शक्तियों के बारे में कोई जानकारी है जी । पहले इन लोको के बारे में अध्ययन कर लेने के बाद इस रचना को लिखते तो ज्यादा सुन्दर रचना बनती । अपनी बेसिरपैर की अजीबोगरीब और सर्वथा बकवास कपोल कल्पना से यह निहायत ही एक कूड़ा करकट जैसी रचना बन गयी है जी । नागराज को आतिश जैसा मुसलमानी नाम दे दिया । जबकि कोई भी हिन्दू माता पिता अपनी सन्तान का नाम मुसलमानी नाम नही रखते है । लेखक महोदय मुस्लिम धर्म के है और उन्हें सनातन धर्म की कोई भी समझ नही है । कृपया अपने ही धर्म से सम्बंधित जिन्न और परी जैसी मिथक कथाओ पर अपनी सर्वथा बकवास और निरर्थक कपोल कल्पना का उपयोग करते तो कोई ठीक ठाक रचना बन सकती थी । शिवि और गौरी दोनो को ही अलग अलग भागो में नागरानी का सम्बोधन मिल रहा है । जबकि कहानी की नायिका वही है । उसी के इर्दगिर्द कहानी घूमती है । ऐसी बेसिरपैर की सर्वथा बकवास कहानी पूरी प्रतिलिपि पर अभी तक पढ़ने में नही आई जी । लेखक को नाग लोक , गरुण लोक जैसे दिव्य लोको की कोई भी गहरी समझ नही है । बस फिल्मी मसाला की तरह जो भी उटपटांग कपोल कल्पनाएं लेखक महोदय के मस्तिष्क में आती गयी बस उसे उसे जोडते चले गए । मिला जुला कर यह एक मनोरंजक मसाला कथा बन गयी है जिससे मनोरंजन तो होता है लेकिन यह सब कमियां भी दृष्टिगोचर होती है । पूरा का पूरा भाग एक ही बार मे पढ़ तो गए किन्तु पढ़ कर बहुत ही निराश हुए । एकदम हास्यास्पद रचना लगी । कुछ भी सिलसिलेवार ढंग का नही लगा । कहानी का कोई भी पात्र सही ढंग से कहानी में कहीं भी फिट नही बैठा । जब मन किया तो किसी को मानवीय रूप में दिखाया और उसी पात्र को जब मन किया तो कभी नाग के रूप में तो कभी गरुड़ के रूप में ? सबसे मजेदार बात यह लगी कि दाई मां , शुचि , हिजड़ा मा , रुक्मणी ये सब सात सौ वर्षों से जीवित है । हिजड़ा मां तो पुरुष रूप में भैरव होकर हिजड़ा क्यो है यह स्पष्ट नही हुआ ? शैल का अगर पुनर्जन्म हुआ तो उसके अपने पिछले नाग जन्म की याद कैसे आ गयी ? शैल पूरे जीवन पति सम्भोग के बगैर तीन महीने में ही दो जुड़वाँ सन्तान को जन्म दे देती है ? वाकई अनोखी कपोल कल्पना है । जबकि मानवीय रूप में कोई भी देव शक्ति इस पृथ्वी पर अवतरित होती है तब उसे भी इस मृत्युलोक के मानवीय नियमो को मानना पड़ता है । दुनिया के किसी भी धर्म सम्प्रदाय के पीर पैगम्बर , साधु महात्मा , ईश्वरीय अवतार जब मानव रूप में जन्म लेते है तब उनके जन्म की प्रक्रिया एक मानव की तरह ही होती है । जबकि यहाँ बिना पति सम्भोग के ही एक गुड़हल का फूल खाकर शैल तीन महीनों में ही दो बच्चियों को जन्म दे देती है । क्या अजीब सी बेकार और बकवास कपोल कल्पना है जी ? ! एकदम बेकार और सर्वथा बकवास रचना । बेसिरपैर की बकवास कपोल कल्पना ।
  • author
    Anuradha Vishwakarma
    03 अक्टूबर 2021
    bahut hi aascharya aur achambhe ki bat h 3month two baby Radhe Radhe
  • author
    Sri nidhi "Shankar"
    30 सितम्बर 2022
    suruat to kaffi suspense bhara hua hai 👍👍👍👍👍👍