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काली परछाई

3.8
57118

● काली परछाई “एक काली परछाई है जो हर वक़्त मेरा पीछा करती रहती है। यह मुझे चैन से जीने नहीं देती, ना ही मरने देती है।“ डेविड ने फुसफुसाते हुए कहा। “क्या वह इस समय हमारे साथ है?” सरकारी ...

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काली परछाई भाग-२
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विनोद कुमार दवे
4.8

पूरे दिन का थका हारा डॉक्टर घर पहुंचा तब रात के दस बजे रहे थे। घर में क़दम रखते ही देखता है, बेटा जुआन खड़ा खड़ा थर थर कांप रहा है। जुआन ने छत की ओर इशारा किया, एडगर ने देखा, उसकी वाइफ जूलिया छत से उल्टी लटकी हुई उसे ही घूर रही थी, उसकी आंखें पूरी काली पड़ गई थी और मुंह से लहू बह रहा था, वह भी ऊपर की ओर… एकदम से जूलिया पलटी और तेजी से भागी, एडगर देखता रह गया। जूलिया भाग रही थी किंतु उसकी परछाई अब तक वहीं छत पर जमी हुई थी। सांप के फुफकारने जैसी उस काली परछाई की हंसी से कमरा दहल गया था… और वहां ...

लेखक के बारे में

एक कहानी संग्रह 'अंतहीन सफ़र पर' इंक पब्लिकेशन से तथा एक कविता संग्रह ’अच्छे दिनों के इंतज़ार में’ सृजनलोक प्रकाशन से प्रकाशितl पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी, कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि में रचनाएं प्रकाशित। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Samir Sharma
    02 பிப்ரவரி 2021
    कहानी शुरू से रोचकता और डर का माहौल पैदा करती हुई आगे बढ़ती है। लगता है कि अपनी पत्नी के अवैध रिश्ते के कारण नायक सभी हत्याएं कर पागलपन का अभिनय कर रहा है, कहानी का मोड़ हैरतअंगेज तब महसूस होता है जब डॉक्टर के फैमिली के साथ भी यह घटना घटती है। उधर नायक की मृत्यु बिना कारण हो जाता है। सस्पेंस के चरम सीमा पर आकर कहानी समाप्त हो जाती है। शायद यह कहानी का एक अंश ही है, और आगे इसका पार्ट पढ़ने को मिले। लेखक का दायित्व है कि पाठको की जिज्ञासा को शांत कर रहस्य से परदा उठाए । बेहतरीन प्रस्तुति के लिए लेखक को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺👌👌👌🙏
  • author
    पम्मी जादौन
    23 ஆகஸ்ட் 2020
    बहुत ही खौफनाक।।लेकिन थोड़ी और लंबी कहानी होनी चाहिए थी।।।बहुत ही मजा आ रहा था कि खत्म हो गया
  • author
    VT sharma
    29 ஜூலை 2020
    बहुत खूब लिखा है आपने सस्पेंस अंत तक बरकरार रखा है वाक्यों में भी नियंत्रण दिखा जिससे कहानी भटके ना। बहुत ख़ूब।
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    Samir Sharma
    02 பிப்ரவரி 2021
    कहानी शुरू से रोचकता और डर का माहौल पैदा करती हुई आगे बढ़ती है। लगता है कि अपनी पत्नी के अवैध रिश्ते के कारण नायक सभी हत्याएं कर पागलपन का अभिनय कर रहा है, कहानी का मोड़ हैरतअंगेज तब महसूस होता है जब डॉक्टर के फैमिली के साथ भी यह घटना घटती है। उधर नायक की मृत्यु बिना कारण हो जाता है। सस्पेंस के चरम सीमा पर आकर कहानी समाप्त हो जाती है। शायद यह कहानी का एक अंश ही है, और आगे इसका पार्ट पढ़ने को मिले। लेखक का दायित्व है कि पाठको की जिज्ञासा को शांत कर रहस्य से परदा उठाए । बेहतरीन प्रस्तुति के लिए लेखक को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺👌👌👌🙏
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    पम्मी जादौन
    23 ஆகஸ்ட் 2020
    बहुत ही खौफनाक।।लेकिन थोड़ी और लंबी कहानी होनी चाहिए थी।।।बहुत ही मजा आ रहा था कि खत्म हो गया
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    VT sharma
    29 ஜூலை 2020
    बहुत खूब लिखा है आपने सस्पेंस अंत तक बरकरार रखा है वाक्यों में भी नियंत्रण दिखा जिससे कहानी भटके ना। बहुत ख़ूब।