pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

दोस्त के भाई से प्यार EP: 1 माली या घर का मालिक?

4.5
156795

सूरत शहर की सुबह में एक सुनहरी तपिश थी, जो वहां के एक आलीशान बंगले के लॉन में बैठे युवा शख्स के खुले बदन को चमका रही थी। उस शख्स ने घुटनों के बल बैठे बस पुराना सूती पायजामा पहना था। उसके हाथ कोहनियों तक और पैर घुटनों तक पूरी तरह कीचड़ में सने थे। चेहरे पर भी मिट्टी की ऐसी परतें जमी थीं कि उसकी तीखी नाक और गहरी आँखों के अलावा कुछ भी पहचान पाना नामुमकिन था। वह बड़ी तल्लीनता से जमीन खोद रहा था, जैसे दुनिया की सारी फिक्र उसी मिट्टी में दफन कर देना चाहता था। उसके पास पेड़ पर बैठे पंछी चहचहा...

अभी पढ़ें
दोस्त के भाई से प्यार EP: 2 आधी रात का आटा कांड
पुस्तक का अगला भाग यहाँ पढ़ें दोस्त के भाई से प्यार EP: 2 आधी रात का आटा कांड
Kriyansh ❤️‍🔥 "Boys Love ki duniya"
4.5

अभय दिन भर की थका देने वाली मीटिंग्स के बाद रात को घर लौटा। जैसे ही उसने लिविंग रूम में कदम रखा, उसका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। सुबह की चेतावनी के बावजूद, हॉल की हालत वैसी ही थी, कुशन इधर-उधर पड़े थे और विवान का एक हेडफोन सोफे पर लावारिस पड़ा था। और इस कहानी का किरदार विवान तो डाइनिंग टेबल पर आराम से बैठे गरमा-गरम डोसा तोड़ रहा था। उसके चेहरे पर वही बेफिक्र मुस्कान थी। "तुमने अब तक ये सब ठीक नहीं किया?" अभय सीधा उसके पास आया, "लगता है तुम्हें मेरी बात समझ नहीं आई। रुको, अभी तुम्हें यहाँ...

लेखक के बारे में
author
Kriyansh ❤️‍🔥

Love knows no boundaries 💓

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sanyogita
    28 മാര്‍ച്ച് 2026
    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने, वैसे तो मैं अब कम पढती हूँ लेकिन मेरी कहानी पर कमेंट करने वालों की डीपी पर लेखक लिखा हो तो उनकी प्रोफाईल खोलकर जरूर देखती हूँ। पहला चैप्टर पढना शुरू किया तो बीच में छोड़ नही पाई, अक्सर राइटर अमीर हीरो को फुल एटीट्यूट में सूट-बूट पहने बाॅडीगार्ड वगैरह के साथ दिखा देते हैं, वो सब पढकर बोर हो चुके हैं, लेकिन आपने तो माली काका..😂 मुझे अच्छा लगा ये देखकर कि अभय बाबू मिट्टी से जुड़े हुए व्यक्ति हैं, अपना काम खुद करने में यकीन रखते हैं, फालतू का घमण्ड नही है उनके अंदर, बस अपनी कडी मेहनत का रुतबा दिखाते हैं। माँ के आज्ञाकारी। दूसरा विवान, अनर्थकारी।😂 आर्यन तो क्यूट लगा। आपके लिखने का अंदाज भी बहुत अच्छा है और सबसे बड़ी बात, मात्राओं की कोई गलती भी नही। ऐसे ही लिखते रहिए...all the best 👍
  • author
    Piyush Puneet 360
    29 മാര്‍ച്ച് 2026
    क्रियांश जी, वाह! आपकी इस रचना को पढ़ते हुए मैं सचमुच सूरत की उस हवेली के गलियारों में पहुँच गया जहाँ विवान की सतरंगी ऊर्जा और अभय प्रताप सिंह का अनुशासन आपस में टकरा रहे हैं। जिस खूबी के साथ आपने उस दृश्य को रचा है जहाँ विवान एक रसूखदार इंसान को माली समझने की भूल कर बैठता है वह वाकई बहुत दिलचस्प है। अभय का वह पाइप से पानी गिराकर खुद को साफ करने वाला अवतार और विवान की मासूम शरारतें एक फिल्म की तरह आँखों के सामने चलने लगती हैं। आपके शब्दों में वह जादू है जो पाठकों को एक पल के लिए भी कहानी छोड़ने नहीं देता। अभय के गुस्से और विवान की चंचलता के इस विरोधाभास ने कहानी में जो सस्पेंस पैदा किया है वह अगले भागों के लिए बेताबी बढ़ा देता है। यदि कभी समय मिले तो आप भी मेरी रचना नफ़रत में लिपटी मोहब्बत को अपनी पारखी नज़रों से देख सकते हैं और अगर आपको सही लगे तो हम इस लेखन यात्रा में एक दूसरे को फॉलो करके साथ आगे बढ़ सकते हैं। सादर, पीयूष शुक्ला।
  • author
    Shalini Sharma
    30 മാര്‍ച്ച് 2026
    bahut achhe se express kiya h sab.....
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sanyogita
    28 മാര്‍ച്ച് 2026
    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने, वैसे तो मैं अब कम पढती हूँ लेकिन मेरी कहानी पर कमेंट करने वालों की डीपी पर लेखक लिखा हो तो उनकी प्रोफाईल खोलकर जरूर देखती हूँ। पहला चैप्टर पढना शुरू किया तो बीच में छोड़ नही पाई, अक्सर राइटर अमीर हीरो को फुल एटीट्यूट में सूट-बूट पहने बाॅडीगार्ड वगैरह के साथ दिखा देते हैं, वो सब पढकर बोर हो चुके हैं, लेकिन आपने तो माली काका..😂 मुझे अच्छा लगा ये देखकर कि अभय बाबू मिट्टी से जुड़े हुए व्यक्ति हैं, अपना काम खुद करने में यकीन रखते हैं, फालतू का घमण्ड नही है उनके अंदर, बस अपनी कडी मेहनत का रुतबा दिखाते हैं। माँ के आज्ञाकारी। दूसरा विवान, अनर्थकारी।😂 आर्यन तो क्यूट लगा। आपके लिखने का अंदाज भी बहुत अच्छा है और सबसे बड़ी बात, मात्राओं की कोई गलती भी नही। ऐसे ही लिखते रहिए...all the best 👍
  • author
    Piyush Puneet 360
    29 മാര്‍ച്ച് 2026
    क्रियांश जी, वाह! आपकी इस रचना को पढ़ते हुए मैं सचमुच सूरत की उस हवेली के गलियारों में पहुँच गया जहाँ विवान की सतरंगी ऊर्जा और अभय प्रताप सिंह का अनुशासन आपस में टकरा रहे हैं। जिस खूबी के साथ आपने उस दृश्य को रचा है जहाँ विवान एक रसूखदार इंसान को माली समझने की भूल कर बैठता है वह वाकई बहुत दिलचस्प है। अभय का वह पाइप से पानी गिराकर खुद को साफ करने वाला अवतार और विवान की मासूम शरारतें एक फिल्म की तरह आँखों के सामने चलने लगती हैं। आपके शब्दों में वह जादू है जो पाठकों को एक पल के लिए भी कहानी छोड़ने नहीं देता। अभय के गुस्से और विवान की चंचलता के इस विरोधाभास ने कहानी में जो सस्पेंस पैदा किया है वह अगले भागों के लिए बेताबी बढ़ा देता है। यदि कभी समय मिले तो आप भी मेरी रचना नफ़रत में लिपटी मोहब्बत को अपनी पारखी नज़रों से देख सकते हैं और अगर आपको सही लगे तो हम इस लेखन यात्रा में एक दूसरे को फॉलो करके साथ आगे बढ़ सकते हैं। सादर, पीयूष शुक्ला।
  • author
    Shalini Sharma
    30 മാര്‍ച്ച് 2026
    bahut achhe se express kiya h sab.....