
प्रतिलिपिसूरत शहर की सुबह में एक सुनहरी तपिश थी, जो वहां के एक आलीशान बंगले के लॉन में बैठे युवा शख्स के खुले बदन को चमका रही थी। उस शख्स ने घुटनों के बल बैठे बस पुराना सूती पायजामा पहना था। उसके हाथ कोहनियों तक और पैर घुटनों तक पूरी तरह कीचड़ में सने थे। चेहरे पर भी मिट्टी की ऐसी परतें जमी थीं कि उसकी तीखी नाक और गहरी आँखों के अलावा कुछ भी पहचान पाना नामुमकिन था। वह बड़ी तल्लीनता से जमीन खोद रहा था, जैसे दुनिया की सारी फिक्र उसी मिट्टी में दफन कर देना चाहता था। उसके पास पेड़ पर बैठे पंछी चहचहा...
रिपोर्ट की समस्या
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