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बुद्धु बक्सा

4.6
12

देखों ये कैसा नज़ारा दिख रहा है आज के जमाने में क्या क्या दिख रहा है ज़माने में जो दिखाया करता था असलियत अब उसी असलियत को खुद ठुकरा रहा है लगाकर पैबंद झूठी शान-ओ-शौकत का गरीबी के मन को यह ललचा रहा है ...

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जीवन की साँझ
जीवन की साँझ
Akanksha Gupta "Vedantika"
4.8
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लेखक के बारे में
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Akanksha Gupta

मैं Vedantika हूँ — शब्दों की वो यात्री, जो ज़िंदगी की सच्चाइयों को मोहब्बत की नज़र से देखती है। मैं एक Cerebral Palsy survivor हूँ, लेकिन मेरी कहानी "संघर्ष" से ज़्यादा "संवेदना" की है। मेरे लिए लिखना सिर्फ़ एक शौक नहीं — एक सांस है, जो मुझे ज़िंदा रखती है। जब मैं लिखती हूँ, तो मैं अपने आप से, अपनी दुनिया से, और अपने हर अधूरे ख्वाब से बातें करती हूँ। मैं इश्क़, इंतज़ार, और ख़ामोशियों पर लिखती हूँ — क्योंकि मुझे लगता है कि हर दिल में कोई अनकही कहानी होती है, बस कोई उसे सुनने की हिम्मत करे तो वो कहानी अमर हो जाती है। मेरी कलम का मक़सद लोगों को महसूस कराना है — कि प्यार कमज़ोरी नहीं, एक ताक़त है। कि जो कुछ हमें रोकता है, वही हमें लिखने की वजह देता है। अगर मेरे अल्फ़ाज़ किसी दिल को थोड़ी राहत दे सकें, किसी को अपनी कहानी कहने की हिम्मत दे सकें, या किसी के होंठों पर मुस्कान ला सकें — तो वही मेरी असली पहचान है। ✍️ “सीमाएँ शरीर में होती हैं, सपनों में नहीं।” मैं Vedantika, वो जो मोहब्बत को शब्दों में ढालती है, और ज़िंदगी को इश्क़ की तरह महसूस करती है।

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    Anju Gupta Asst. Teacher UPS Lalumar
    19 मई 2023
    wah
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    Anju Gupta Asst. Teacher UPS Lalumar
    19 मई 2023
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