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हिज्र - नामा

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* थोड़ा आहिस्ता चलो धड़कनें तेज़ हो जाती है, ऐसे गुमसुम न रहा करो, दिल में बैचेनी हो जाती है, तुम्हारे होने से ही गुलशन है, और तुम्हारे न होने से हम भी कहा पूरे है, अच्छा सुनो! सुबह की पहली किरण भी...

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प्यार का मौसम
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Divya Singh "शिवानीता"
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* प्यार का मौसम आया है, सभी मिलन जाएंगे। जिनकी बात नहीं बनी है, वो भी अपनी बात मनवाएंगे। फूल चाहे गुलाब हो या गेंदे, सभी के हाथों में नज़र आएंगे, कुछ कांटे बिछ जाएंगे, कुछ निभा रहे जाएंगे। नई...

लेखक के बारे में
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Divya Singh

दिल की बातों को लफ्ज़ों में पिरोती हूँ। मैं Divya Singh "शिवानीता" - एक एहसास हूँ, जो टूटे दिलों की आवाज़ लिखती हूँ। मेरी हर नज़्म मेरे दिल का एक पन्ना है, हर शायरी एक अधूरी कहानी। मैं मोहब्बत, जुदाई, तन्हाई, इंतज़ार और उन ख्वाहिशों के बारे में लिखती हूँ जो कभी पूरी नहीं हो पाईं। "हिज्र-नामा" मेरी तन्हाइयों का सफर है, मेरी 500 नज़्मों का एक कारवां, जो मेरे दर्द और मेरे इश्क की गवाही देता है। शायर नहीं हूँ, बस कुछ अधूरी मोहब्बतों का हिसाब रखती हूँ। अगर मेरे लफ्ज़ों में आपको अपना दर्द दिखे, तो समझना हम एक ही कहानी के मुसाफिर हैं। पढ़ने के लिए, समझने के लिए और मेरे साथ इस सफर में रहने के लिए दिल से शुक्रिया। - Divya Singh "शिवानीता"🪷

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    Subhalaxmi 🌷
    08 सितम्बर 2026
    ❤️🌷
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