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मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया-मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया

4.3
221726

ट्रेन धड़धड़ाती हुई चली जा रही थी। बाहर अँधेरा हो चुका था। वो बोगी लगभग खाली थी। ज्यादा यात्री नहीं थे उसमें।उसने घड़ी देखी तो रात के नौ बज रहे थे। अब तक तो उसे घर पहुंचे दो घंटे हो गए होते। पर ...

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मुर्दों की ट्रेन - शैतान से समझौता - निया-मुर्दों की ट्रेन-1
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वर्षा
4.8

ट्रेन अपनी रफ्तार से चली जा रही थी। वो अलसाई सी एक खिड़की के पास सर टिकाए बैठी हुई थी। उसे हमेशा ही ट्रेन का सफर उबाऊ लगता था। मगर क्या करें जहाँ वह जा रही थी वहाँ तक ट्रेन से ही पहुँचा जा सकता ...

लेखक के बारे में
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वर्षा

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समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Pinky
    12 మార్చి 2019
    interesting 👌 next part plz
  • author
    06 జూన్ 2019
    पूरे 6 भाग है इस कहानी के। और वर्षा जी खास आपसे कहना चाहता हूं कि अंधेरे कमरे में पढ़ते पढ़ते मुझे एक समय ऐसे लगा कि एक यात्री उस ट्रेन का मेरे कंधे पे हाथ रखने वाला है। बढ़िया लेखन, और वर्णन।
  • author
    दिनेश दिवाकर
    06 ఆగస్టు 2019
    बहुत सुंदर कहानी है
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Pinky
    12 మార్చి 2019
    interesting 👌 next part plz
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    06 జూన్ 2019
    पूरे 6 भाग है इस कहानी के। और वर्षा जी खास आपसे कहना चाहता हूं कि अंधेरे कमरे में पढ़ते पढ़ते मुझे एक समय ऐसे लगा कि एक यात्री उस ट्रेन का मेरे कंधे पे हाथ रखने वाला है। बढ़िया लेखन, और वर्णन।
  • author
    दिनेश दिवाकर
    06 ఆగస్టు 2019
    बहुत सुंदर कहानी है