अगले दिन शिवाय उठा तो देखा 7:00 बज गए हैं और शंकर अभी तक उठा नहीं वह शंकर के कमरे में गया उसने देखा शंकर अब तक सो रहा है उस ने आवाज लगाई! शंकर उठो स्कूल नहीं जाना क्या! शंकर जल्दी से उठा और ...
मै जीवन के संघर्ष , रिश्तों की गहराई और भावनाओं को शब्दों में ढालने की कोशिश करती हूं। आशा है पाठक उसे अपने जीवन से जुड़ता महसूस करते होंगे।वह कहानी के नायक नायिका या खलनायक हो सकतें हैं।
सारांश
मै जीवन के संघर्ष , रिश्तों की गहराई और भावनाओं को शब्दों में ढालने की कोशिश करती हूं। आशा है पाठक उसे अपने जीवन से जुड़ता महसूस करते होंगे।वह कहानी के नायक नायिका या खलनायक हो सकतें हैं।
रिपोर्ट की समस्या
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