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कशिश

4.5
38731

ओह 7:40 हो गये। घर से दो घंटे पहले निकलने के बावजूद भी ट्राफिक के कारण स्टेशन पहुँचते पहुँचते इतनी देर हो गयी थी कि हाँफते हाँफते जब प्लेटफार्म पर पहुँची तो गाड़ी प्लेटफार्म पर जस्ट इन्टर कर रही ...

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पल पल के फूल
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Arunima Dinesh Thakur "अनु"
4.9

बुआ देखिए वह हमारी साईकल के पास क्या कर रहा है ? कहीं हमारी साईकल ...। हम कदम बढ़ाते हुए अपनी साईकल के पास आये। वह वहाँ से हट गया था। अरे ! यह यहाँ ?  कैसे ? बरसों बाद भी मेरी साइकिल पर पल-पल के फूलों ...

लेखक के बारे में
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Arunima Dinesh Thakur

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समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Jugraj Dhamija Advocate
    14 मार्च 2019
    बहुत सुंदर। हर व्यक्ति के दिल मे ऐसी कशिश के लिये कशमकश चलती है । कई लोग बोल पाते है और अपने प्यार को हासिल कर लेते है। और कई लोग कहानी के पात्रों की तरह सारी उम्र कशमकश में ही रहते है और कई बार मामा या भुआ बन जाते है।
  • author
    Manju Sharma
    24 अगस्त 2019
    बेहतरीन उमदा रचना, मुझे लगता है कि ऐसी कशमकश शायद सभी के जीवन में हो सकती हैं मेरे लिए यह एक सच्ची कहानी है ।
  • author
    पवनेश मिश्रा
    30 जुलाई 2019
    आठवें जन्म की परिकल्पना के साथ क्रश को जोड़कर आपने सिर्फ एक कथानक नहीं लिखा अरुणिमा जी बल्कि आपने उन नितांत निजी विचारों को भी सहज सुंदरता के साथ लिखा जिन्हें अक्सर वक़्त की रेत दबाती नहीं बल्कि परत दर परत नीचे धकेलती जाती है लेकिन वह अपल्लवित कोमल भावनाएं कभी न कभी अंकुरित हो ही जाती हैं, विनम्र साधुवाद 🙏🌹🙏
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    Jugraj Dhamija Advocate
    14 मार्च 2019
    बहुत सुंदर। हर व्यक्ति के दिल मे ऐसी कशिश के लिये कशमकश चलती है । कई लोग बोल पाते है और अपने प्यार को हासिल कर लेते है। और कई लोग कहानी के पात्रों की तरह सारी उम्र कशमकश में ही रहते है और कई बार मामा या भुआ बन जाते है।
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    Manju Sharma
    24 अगस्त 2019
    बेहतरीन उमदा रचना, मुझे लगता है कि ऐसी कशमकश शायद सभी के जीवन में हो सकती हैं मेरे लिए यह एक सच्ची कहानी है ।
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    पवनेश मिश्रा
    30 जुलाई 2019
    आठवें जन्म की परिकल्पना के साथ क्रश को जोड़कर आपने सिर्फ एक कथानक नहीं लिखा अरुणिमा जी बल्कि आपने उन नितांत निजी विचारों को भी सहज सुंदरता के साथ लिखा जिन्हें अक्सर वक़्त की रेत दबाती नहीं बल्कि परत दर परत नीचे धकेलती जाती है लेकिन वह अपल्लवित कोमल भावनाएं कभी न कभी अंकुरित हो ही जाती हैं, विनम्र साधुवाद 🙏🌹🙏