रात क़ी कालीमा के साथ, नींदों को तहखानों में बंद करके तो देखो, कैसे अंधेरा साथी बन जाता है, ... मन जब घबराए, होंसला अंगूठा दिखाए, थोड़ा से दिल में खुद पर भरोसा जगाकर तो देखो, कैसे होंसला खुद का साया ...
पल- पल, हर लम्हा फिसल रही है जिन्दगी।
कुछ तो खुशी चुरा, गम को महसूस कर " ए" मेरे नन्हे से दिल।
जज्बातों का दिल पर मरहम लगा।जो भी अरमान है सीने में।
इन्हे जी भर कर जी ले जरा........सीमित दायरों के पंख लगाकर,
खुले आकाश में उड़ जा.......चल उड़ डा
सारांश
पल- पल, हर लम्हा फिसल रही है जिन्दगी।
कुछ तो खुशी चुरा, गम को महसूस कर " ए" मेरे नन्हे से दिल।
जज्बातों का दिल पर मरहम लगा।जो भी अरमान है सीने में।
इन्हे जी भर कर जी ले जरा........सीमित दायरों के पंख लगाकर,
खुले आकाश में उड़ जा.......चल उड़ डा
रिपोर्ट की समस्या
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