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ज़िंदगी

4.6
916

ज़िन्दगी ............. sanjiv nigam कुछ देर के लिए कुछ मत देखो, कुछ मत कहो, कुछ मत सुनो, बस गुम रहो अपने आप में, ऐसे, जैसे दुनिया में तुम्हारे सिवाय और कोई नहीं है। कुछ देर के लिए भूल जाओ कि तुम हो ...

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लेखक के बारे में
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संजीव निगम

जन्मतिथि - १६ अक्तूबर हर परिस्थिति या घटना को एक अलग नज़र से देखने वाले हिंदी के चर्चित रचनाकार.संजीव निगम कविता, कहानी,व्यंग्य लेख , नाटक आदि विधाओं में सक्रिय रूप से लेखन कर रहे हैं. अनेक पत्रिकाओं-पत्रों में रचनाओं का लगातार प्रकाशन हो रहा है. मंचों , आकाशवाणी और दूरदर्शन से रचनाओं का नियमित प्रसारण. रचनाएं कई संकलनों में प्रकाशित हैं जैसे कि : 'नहीं अब और नहीं', 'काव्यांचल',' अंधेरों के खिलाफ','मुंबई के चर्चित कवि' आदि . कई सम्मान प्राप्त जिनमे कथाबिम्ब कहानी पुरस्कार, व्यंग्य लेखन पर रायटर्स एंड जर्नलिस्ट्स असोसिअशन सम्मान, प्रभात पुंज पत्रिका सम्मान,अभियान संस्था सम्मान आदि शामिल हैं. एक अत्यंत प्रभावी वक्ता और कुशल मंच संचालक भी. कुछ टीवी धारावाहिकों का लेखन भी किया है. इसके अतिरिक्त 18 कॉर्पोरेट फिल्मों का लेखन भी.स्वाधीनता संग्राम और कांग्रेस के इतिहास पर ' एक लक्ष्य एक अभियान ' नाम से अभिनय-गीत- नाटक मय स्टेज शो का लेखन जिसका मुंबई में कई बार मंचन हुआ. गीतों का एक एल्बम प्रेम रस नाम से जारी हुआ है. आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से 16 नाटकों का प्रसारण.

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ravindra N.Pahalwam
    03 अक्टूबर 2018
    अपने खुद से मिलने का संदेश मिलता है इस रचना में / थीम बहुत ही अच्छी है /
  • author
    suchita bhagat
    17 अक्टूबर 2023
    achi soch parilakshit horahi hai aapki rachna me
  • author
    Jayshree Rai
    23 फ़रवरी 2022
    वाह बेहतरीन रचना👌👌👌👌
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    Ravindra N.Pahalwam
    03 अक्टूबर 2018
    अपने खुद से मिलने का संदेश मिलता है इस रचना में / थीम बहुत ही अच्छी है /
  • author
    suchita bhagat
    17 अक्टूबर 2023
    achi soch parilakshit horahi hai aapki rachna me
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    Jayshree Rai
    23 फ़रवरी 2022
    वाह बेहतरीन रचना👌👌👌👌