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यूंही

4.1
718

बस यूंही गुज़र रहा है दिन सोचते सोचते बस यूंही गुज़र रही है ज़िन्दगी सोचते सोचते बस एक ठंडी हवा का मस्त झोंका आया सोचते सोचते बस एक गरम हवा बदन पस्त कर गई सोचते सोचते बस रिश्ते बनते टूटते रहे सोचते ...

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लेखक के बारे में

फुरसत के पल कलम के साथ बिताता हूँ। प्रतिलिपि ने 2016 में मुझे लोकप्रिय लेखक का एक छोटा सा सम्मान दिया। अप्रैल 2022 में कहानी 'पागल' को पुरस्कृत किया। प्रतिलिपि सुपर लेखक अवार्ड्स 4 में "यही जीवन है" पुरस्कृत है। पेपरबैक और किंडल पर उपलब्ध मेरी पुस्तकों का लिंक है https://amzn.to/3mN1L4M

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    विकास कुमार
    02 जुलाई 2018
    वाह
  • author
    Manjit Singh
    03 जुलाई 2020
    kaavy udaasinta darshata hai
  • author
    Sanjay Negi
    01 जून 2021
    अति सुन्दर प्रस्तुति
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  • author
    विकास कुमार
    02 जुलाई 2018
    वाह
  • author
    Manjit Singh
    03 जुलाई 2020
    kaavy udaasinta darshata hai
  • author
    Sanjay Negi
    01 जून 2021
    अति सुन्दर प्रस्तुति