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|| ये रिश्ता यूंहि चलता रहे ||

4.4
345

||ये रिश्ता यूंहि चलता रहे || बेनकाब चेहरे यहाँ पथ्थर नुमा छाती दिल रो देता है जब होती है मनमानी हो रहा म्रत्यू तांडव माताओं का हरद्य वेदन चहूँ ओर चीख पुकार हरद्य बींधता , हाहाकार परवश बहता रुधिर ...

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लेखक के बारे में
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विकास कुमार

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समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    12 फ़रवरी 2018
    बहुत ही अच्छी कविता ।😊👌
  • author
    29 अप्रैल 2018
    लाजवाब शब्दो का मेल दिल खुश हो गया ये रचना पढ़कर
  • author
    Damaru Miki
    11 मई 2019
    wow , super
  • author
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    12 फ़रवरी 2018
    बहुत ही अच्छी कविता ।😊👌
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    29 अप्रैल 2018
    लाजवाब शब्दो का मेल दिल खुश हो गया ये रचना पढ़कर
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    Damaru Miki
    11 मई 2019
    wow , super