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हिन्दी

ये इश्क नहीं आसां

4.8
33

ये इश्क इतना आसां नहीं है  जितना यह नजर आता है  अपनी महबूबा की खातिर  कोई अपना सर्वस्व लुटाता है  ये उसकी किस्मत है कि उसे  इश्क़ में कामयाबी मिले ना मिले  मगर यह लेन-देन सोचकर के  क्या कभी कोई ...

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लेखक के बारे में
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श्री हरि

हरि का अंश, शंकर का सेवक हरिशंकर कहलाता हूँ अग्रसेन का वंशज हूँ और "गोयल" गोत्र लगाता हूँ कहने को अधिकारी हूँ पर कवियों सा मन रखता हूँ हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान से बेहद, प्यार मैं दिल से करता हूँ ।। गंगाजल सा निर्मल मन , मैं मुक्त पवन सा बहता हूँ सीधी सच्ची बात मैं कहता , लाग लपेट ना करता हूँ सत्य सनातन परंपरा में आनंद का अनुभव करता हूँ हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान से बेहद, प्यार मैंदिल से करता हूँ

समीक्षा
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    अनन्या श्री "अनु" सुपरफैन
    15 दिसम्बर 2020
    जरूरी नहीं कि वो भी तुम्हें चाहे.... ये कुछ ज्यादा भाया हमें.... क्योंकि एक तरफ़ा मोहब्बत की सबसे बड़ी खास बात ये होती है कि उसे कोई न छीन सकता है,, और न उसके खोने का डर रहता है... क्या ख्याल है आपका,,,,????????
  • author
    Reeta Gupta "रश्मि"
    15 दिसम्बर 2020
    सही कहा आपने। इश्क लेना नहीं देना जानता है।
  • author
    श्वेता विजय mishra
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत बेहतरीन शानदार लाजवाब पंक्तियां लिखी आपने बहुत खूब सर
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    अनन्या श्री "अनु" सुपरफैन
    15 दिसम्बर 2020
    जरूरी नहीं कि वो भी तुम्हें चाहे.... ये कुछ ज्यादा भाया हमें.... क्योंकि एक तरफ़ा मोहब्बत की सबसे बड़ी खास बात ये होती है कि उसे कोई न छीन सकता है,, और न उसके खोने का डर रहता है... क्या ख्याल है आपका,,,,????????
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    Reeta Gupta "रश्मि"
    15 दिसम्बर 2020
    सही कहा आपने। इश्क लेना नहीं देना जानता है।
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    श्वेता विजय mishra
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत बेहतरीन शानदार लाजवाब पंक्तियां लिखी आपने बहुत खूब सर