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यादें है ये गांव की

4.6
432

कुछ यादें जो भुलाये नहीं भूलती है ,उसपे अगर वो यादें गांव की हो तो उसकी बात ही कुछ और है .........

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लेखक के बारे में

मैं प्रदीप कुमार केन्द्रीय विद्यालय , बगाफा त्रिपुरा में पी.जी.टी. हिंदी पद पर कार्य कर रहा हूँ lमुझे हिंदी भाषा में कहानियां और कवितायेँ लिखना और पढ़ना अच्छा लगता है l

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    21 जुलाई 2020
    kavita bahut pasand aaye. mei shahar me janma pala hu par dil mera gaon me basta hai. God bless you millions of times. l salute u
  • author
    13 सितम्बर 2018
    गांव से शहर तक का अतिसूक्ष्म वर्णन है। उम्दा लगा
  • author
    Rekha Mishraji
    10 मार्च 2023
    आपका पद्य अति उत्तम है
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  • author
    Manjit Singh
    21 जुलाई 2020
    kavita bahut pasand aaye. mei shahar me janma pala hu par dil mera gaon me basta hai. God bless you millions of times. l salute u
  • author
    13 सितम्बर 2018
    गांव से शहर तक का अतिसूक्ष्म वर्णन है। उम्दा लगा
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    Rekha Mishraji
    10 मार्च 2023
    आपका पद्य अति उत्तम है