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वो सूखा पेड़

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पता है... बसंत ऋतू चल रही है... रोज सुबह जाते वक़्त रास्ते में हरे पेड़..रंग बिरंगे फूल... मन को भाते हैं... पर मैं न जाने उसी को निहारता रहता हूं... मानो वो इन सबसे अधिक सुन्दर हो... ऐसा भी तो नही वो ...

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लेखक के बारे में

जिंदगी एक सफर है, फर्क सिर्फ इतना है कि जिसको इस सफर में कुछ अपने मिल जाते हैं, उसका सफर आसान हो जाता है, और जिसको कोई नहीं मिलता उसे ये सफर अंत तक अकेले ही करना पड़ता है कभी किसी को आसानी से मंजिल मिल जाती है और कभी कभी किसी का रास्ता ही खत्म नही होता ...... मेरे प्रिय पाठकों, आप लोग मेरी कहानियां पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, पढ़कर बहुत अच्छा लगता है, ऐसे ही मेरी कहानियों को अपना प्यार देते रहिए और मुझे सब्सक्राइब भी करते रहिए , मैं ऐसे ही आपको अपनी कहानियों के जरिए मिलता रहूंगा । धन्यवाद । [email protected]

समीक्षा
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    Pradip Sinha
    08 अप्रैल 2022
    👍👍👍👍👍👍😊😊😊😊
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    08 अप्रैल 2022
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