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ओ मेरे शरीर

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ओ शरीर आज तुम कितने थके आज तुमने कितनी सीढ़ियां चढ़ीं सारे दिन तुम को बाईक पर घुमाता रहा सुबह न एक्सरसाइज दी न नाश्ता तुम्हें लिए लिए देर तक पड़ा रहा फिर जल्दी पहुंचने की भागम भाग में दौड़ता रहा, खींचता ...

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लेखक के बारे में

रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति 1 जून 1970 ग्राम सियलपुर तह सिरोंज जिला विदिशा शिक्षा - एम ए बीएड, फिल्म स्क्रिप्ट राइटिंग, इग्नू    प्रकाशन  आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य, वागर्थ, कथादेश, हंस, परिकथा, आउटलुक, इंडियाटुडे, दैनिक भास्कर नवभारत, हिंदुस्तान, सहारा समय , लोकमत समाचार, आदि में कहानी कविताएं प्रकाशित।  कई साक्षत्कार राजेंद्र यादव, मैनेजर पांडे , कमलेश्वर, राजेश जोशी, विजय बहादुर सिंह, रमेश चन्द्र शाह  सम्मान  कहानी के लिए राजस्थान पत्रिका का   प्रथम पुरस्कार   कविता के लिए रजा सम्मान    पुस्तकें: कोलाज अफेयर मन का ट्रेक्टर  (कहानी संग्रह शीघ्र प्रकाश्य ) बाल कविताएं संप्रति  कोलाज  कला आर्ट पत्रिका का संपादन   पीपुल्स समाचार भोपाल में कार्यरत    पता - टॉप १२ हाई लाइफ काम्प्लेक्स चर्च रोड जहंगीरा बाद भोपाल  मोबा-9098410010 स्थाई पता  110 , आर एम पी नगर फेस 1 , विदिशा http://ravindraswapnil.blogspot.com www.kavitakoshravindraswapnil.com   

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ravindra N.Pahalwam
    07 अक्टूबर 2018
    हम वह सब करते हैं जो हमें शरीर के लिए नहीं करना चाहिए / इस लिए रचनाकार अंत में माफी मांगते हैं / पाठक का ध्यान सही जगह आकर्षित किया है. सफल रचना...
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 अक्टूबर 2015
    अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है । हिंदी में कविता लिखने का शौक मुझे भी था पर इस स्वार्थी संसार ने राष्ट्र भाषा अनुसरण न करने दिया ।
  • author
    मिर्ज़ा वसीम
    08 अक्टूबर 2017
    nice, body supports us every day, so that's way we should take care of it too.
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    Ravindra N.Pahalwam
    07 अक्टूबर 2018
    हम वह सब करते हैं जो हमें शरीर के लिए नहीं करना चाहिए / इस लिए रचनाकार अंत में माफी मांगते हैं / पाठक का ध्यान सही जगह आकर्षित किया है. सफल रचना...
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 अक्टूबर 2015
    अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है । हिंदी में कविता लिखने का शौक मुझे भी था पर इस स्वार्थी संसार ने राष्ट्र भाषा अनुसरण न करने दिया ।
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    मिर्ज़ा वसीम
    08 अक्टूबर 2017
    nice, body supports us every day, so that's way we should take care of it too.