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वो चल कर आ नहीं सकता

4.5
922

वो ऐसा ख़्वाब है जिसको कभी मैं पा नही सकता, मगर यह बात अपने दिल को मैं समझा नहीं सकता. मुझे बहला नहीं सकता नई तहज़ीब का जादू, मेरे बच्चे कभी मुझको शहर लौटा नहीं सकता. तुझे मैं किस लिए फिर आसमाँ का ...

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लेखक के बारे में
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अशोक रावत
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Raj Bhalla
    04 अप्रैल 2019
    बहुत उम्दा ग़ज़ल है।
  • author
    Prakash Patil
    08 अक्टूबर 2020
    बहुत अच्छी गज़ल है |
  • author
    Manish Shaw
    12 अप्रैल 2019
    बहुत ही बढ़िया
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Raj Bhalla
    04 अप्रैल 2019
    बहुत उम्दा ग़ज़ल है।
  • author
    Prakash Patil
    08 अक्टूबर 2020
    बहुत अच्छी गज़ल है |
  • author
    Manish Shaw
    12 अप्रैल 2019
    बहुत ही बढ़िया