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वह टूटी कड़ी

4.4
68841

"आप....!! आप विभास हैं न....!" किसी ने अटकते हुए मीठी आवाज़ में कहा। फ्लाइट बोर्डिंग के लिए लाइन में खड़े विभास ने पीछे मुड़कर देखा। "अरे गीतू!" उसने हैरानी से कहा। " कमाल है आप तो तुरंत ही पहचान ...

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लेखक के बारे में
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सरिता कुमारी

शिक्षा- एम. ए. (संस्कृत), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहबाद कार्यक्षेत्र-भारतीय राजस्व सेवा(आय कर) कृतियाँ - कविता संग्रह- "अनुभूति" (वर्ष 2014), "एक टुकड़ा धूप का"( वर्ष 2015) में प्रकाशित कहानी संग्रह 'उजालों के रंग' शीर्षक से - अनुज्ञा बुक्स, 1/10206,लेन नं. 1E, वेस्ट गोरख पार्क, शाहदरा, दिल्ली -110032, email : anuugyabooks@gmail.com, salesanuugyabooks@gmail.com, फोन : 011 - 22825424, 09350809192 www : anuugyabooks.com से वर्ष 2018 में प्रकाशित। कई कहानियाँ, 'साहित्य अमृत', प्रतिलिपि. कॉम की ई पत्रिका 'प्रतिलिपि लेखनी', कथाक्रम', 'परिकथा', 'वागर्थ', 'कथादेश',' इंद्रप्रस्थ भारती',' पाखी',' नया ज्ञानोदय', 'निकट', 'आधुनिक साहित्य',' हिन्दी चेतना', 'भवन्स नवनीत', 'कादम्बिनी', 'वार्षिक पुनर्नवा',' वार्षिक लोकमत विशेषांक', समाचारपत्र 'दैनिक जागरण',' जनसत्ता', 'दैनिक भास्कर' आदि में प्रकाशित।

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    दीप यादव "कलप"
    11 जनवरी 2017
    तू हैं कौन , जिसकी रेत सी मुस्कराहट देखते ही मुझमें बिखर जाती हैं , फासले होते हुए भी , हर समय अकेले चाय पर साथ दे जाती हैं , मजबूर होते हुए भी , हर रात मेरी यादों में आ जाती हैं , भीड़ में गुम होते हुए भी, हाथ पकड कर सारे रास्ते पार करा जाती हैं , ओह, तू हैं एक एहसास , जो मुझमें हैं और मुझमें ही रहना चाहती है | तू हैं एक रात , जो मेरी हैं और मुझमें ही सोना चाहती हैं | तू हैं एक दुनिया , जो मेरी हैं और मुझमें ही बसना चाहती हैं | तू हैं एक मुस्कराहट , जो रेत सी हैं और मुझ पर ही बिखरना चाहती हैं | ये मेरा मानना हैं, लेकिन तू हैं कौन ?
  • author
    कीर्ति प्रकाश
    17 अप्रैल 2019
    बहुत अच्छी कहानी. साथ ही ये सिखाती हुई भी कि भरोसा इतनी जल्दी ना तो किसी बात पे करो और ना ही जिसपे भरोसा हो उसे एकतरफा यूँही गुनाहगार मानो. स्थिति को परखना ज़रूर चाहिए किसी भी निर्णय पे जाने से पहले.🙏💐👍
  • author
    05 मार्च 2018
    क्या कुछ नकारात्मक होने के बाद ही प्यार पर विश्वास होता है.... अच्छी कहानी....
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    दीप यादव "कलप"
    11 जनवरी 2017
    तू हैं कौन , जिसकी रेत सी मुस्कराहट देखते ही मुझमें बिखर जाती हैं , फासले होते हुए भी , हर समय अकेले चाय पर साथ दे जाती हैं , मजबूर होते हुए भी , हर रात मेरी यादों में आ जाती हैं , भीड़ में गुम होते हुए भी, हाथ पकड कर सारे रास्ते पार करा जाती हैं , ओह, तू हैं एक एहसास , जो मुझमें हैं और मुझमें ही रहना चाहती है | तू हैं एक रात , जो मेरी हैं और मुझमें ही सोना चाहती हैं | तू हैं एक दुनिया , जो मेरी हैं और मुझमें ही बसना चाहती हैं | तू हैं एक मुस्कराहट , जो रेत सी हैं और मुझ पर ही बिखरना चाहती हैं | ये मेरा मानना हैं, लेकिन तू हैं कौन ?
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    कीर्ति प्रकाश
    17 अप्रैल 2019
    बहुत अच्छी कहानी. साथ ही ये सिखाती हुई भी कि भरोसा इतनी जल्दी ना तो किसी बात पे करो और ना ही जिसपे भरोसा हो उसे एकतरफा यूँही गुनाहगार मानो. स्थिति को परखना ज़रूर चाहिए किसी भी निर्णय पे जाने से पहले.🙏💐👍
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    05 मार्च 2018
    क्या कुछ नकारात्मक होने के बाद ही प्यार पर विश्वास होता है.... अच्छी कहानी....