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वाह फ़साना अच्छा था

4.4
699

हमने हाल-ए-दिल कह दी उसने सुनकर फैला दी सबसे मुंह से निकला कि वाह फ़साना अच्छा था...

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लेखक के बारे में

नमस्ते, अपनी रचनाओं के साथ मैं आपके सामने उपस्थित हूँ | मेरी अधिकतर रचनाएँ तब की हैं जब मैं स्कूल या कॉलेज में पढ़ता था | उस समय प्रेम और भावनाएं मुझे बहुत आकर्षित करती थीं, इसलिए मेरी कहानियों और कविताओं में थोडा युवा होते मन की झलक मिलेगी | आपसे गुजारिश है कि मेरी कहानियों और कविताओं को पढ़ें, इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता महसूस हो तो मुझे बताकर बेहतर बनाने में मदद करें | शुभकामनाओं सहित, आपका अतुल कुमार पाण्डेय

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Deepak kashyap
    06 अप्रैल 2022
    nice Ji
  • author
    pradhan g
    05 जनवरी 2019
    sir main fan ho gya aapka. suprb nice osm
  • author
    प्रिया सिंह "Life🧬"
    03 अक्टूबर 2018
    बहुत सुन्दर रचना
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    Deepak kashyap
    06 अप्रैल 2022
    nice Ji
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    pradhan g
    05 जनवरी 2019
    sir main fan ho gya aapka. suprb nice osm
  • author
    प्रिया सिंह "Life🧬"
    03 अक्टूबर 2018
    बहुत सुन्दर रचना