
प्रतिलिपि21 नवंबर-320वीं जयंती पर विशेष वाल्तेयरः कालजयी उपन्यास ‘केनडाइड’ के दार्शनिक लेखक राजीव आनंद ‘तुम जो कहते हो वह मुझे नामंजूर है पर मैं मरते दम तक तुम्हारे बोलने के अधिकार की प्रतिरक्षा करूंगा’, कहना था वाल्तेयर का, जो अगर नहीं होते तो फ्रांस की क्रांति भी नहीं होती। नागरिक अधिकार, धर्मिक स्वतंत्राता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, चर्च और राज्य के पृथ्थकरण के लिए उन्होंने अपनी विभिन्न रचनाओं के माघ्यम से जंग छेड़ रखा था, जिसके लिए उन्हें कई बार देश निकाला तो कई बार जेल जाना पड़ा था फिर भी...
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