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वो खराब हो गई

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वो घरों से भागा,बहला- फुसला अंधेरे कोठरियों में बंद कर दी जाती खुब सजाई सँवारी जाती जैसे बलि का बकरा को मनोकामना की आहूती के लिए! एक रात की दुल्हन बनती रोज आते उसे दुल्हे लेने पर कभी उसकी डोली कोई...

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समीक्षा
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    प्रिया सिंह "Life🧬"
    26 സെപ്റ്റംബര്‍ 2018
    बहुत ही अच्छी रचना।एक संवेदनशील मुद्दे पर लिखा है, काबिले तारीफ।मैं अक्सर सोचती हूँ वेश्या के कोठे से निकलने के बाद एक आदमी साफ हो जाता है, उसपर कोई कलंक नहीं लगता ,वो वापस से किसी का बेटा पति और बाप बड़े शान से बन कर घूमता है,फिर वेश्याएं गन्दी कैसे हो जाती हैं???
  • author
    ABHISHEK JAIN
    16 ജൂണ്‍ 2021
    hey bhagwan usko ek beti jarur dena jisne kisi ki beti pe najar daali ho
  • author
    vibhuti varshney
    18 ജൂണ്‍ 2019
    Bahut sensitive poetry .....Ma'm 😥
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    प्रिया सिंह "Life🧬"
    26 സെപ്റ്റംബര്‍ 2018
    बहुत ही अच्छी रचना।एक संवेदनशील मुद्दे पर लिखा है, काबिले तारीफ।मैं अक्सर सोचती हूँ वेश्या के कोठे से निकलने के बाद एक आदमी साफ हो जाता है, उसपर कोई कलंक नहीं लगता ,वो वापस से किसी का बेटा पति और बाप बड़े शान से बन कर घूमता है,फिर वेश्याएं गन्दी कैसे हो जाती हैं???
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    16 ജൂണ്‍ 2021
    hey bhagwan usko ek beti jarur dena jisne kisi ki beti pe najar daali ho
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    vibhuti varshney
    18 ജൂണ്‍ 2019
    Bahut sensitive poetry .....Ma'm 😥