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विश्वास हो तुम मेरा

4.4
21306

उस छुअन में कुछ था...अक्स्मात हुआ वह स्पर्श ...लेकिन ऐसा लगा मानो जिस्म में अनगिनत फूलों की खुशबू बस गई हो. बारिश की गलकी-हलकी फुहारों का एहसास था उस छुअन में. कभी-कभी क्षण भर में भी जीवन के अनंत ...

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लेखक के बारे में
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सुमन बाजपेयी

दिल्ली में जन्म। एम.ए. हिंदी आनर्स व पत्रकारिता का अध्ययन। कैरियर का आरंभ ’चिन्ड्रन्स बुक ट्रस्ट’ से किया तथा यहीं से बाल-लेखन की भी शुरुआत हुई। उसके बाद ’जागरण सखी’, ’मेरी संगिनी’ और ’फोर्थ डी वुमन’ नामक पत्रिकाओ में विभिन्न संपादकीय पदों पर काम किया. पिछले 32 सालों से कहानी, कविता व महिला विषयों तथा बाल-लेखन में संलग्न. ’खाली कलश’, ’ठोस धरती का विश्वास, अग्निदान, एक सपने के सच होना और पीले झूमर नामक कहानी-संग्रह समेत 600 से अधिक कहानियां व 1000 से अधिक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन.  150 से अधिक पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद. पेरेटिंग पर पर दो किताबें प्रकाशित – अपने बच्चे को विजेता बनाएं तथा सफल अभिभावक कैसे बनें. व अन्य पुस्तकें जैसे जैसे मलाला हूं मैं, इंडियन बिजनेस वूमेन, नागालैंड की लोककथाएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं. लोककथाओं पर 2 पुस्तकें प्रकाशाधीन. संप्रतिः स्वतंत्र पत्रकारिता व लेखन व पर्यटन पर लेखन

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Nishi Yadav
    27 सितम्बर 2018
    kabhi kabhi hum jo chahte hain..vo paa nahi sakte.. ..isi kahani par mujhe kuch yaad aa raha hai ki.... yeh sach hai ki main tumhe paana nahi chahta....yeh sach hai ki main tumhe paana nahi chahta... par usse bhi bada sach yeh hai ki main tumhe KHONA NAHI CHAHTA...
  • author
    सौम्या झा
    09 मई 2017
    आपकी कहानी पढ़ी "विश्वास हो तुम मेरा" कुछ बड़े ही नाज़ुक ख्यालों, सवालों और जवाबों को बुनती, बड़ी प्यारी कहानी थी। न जाने क्यों एक लगाव महसूस किया ढेरों बधाइयाँ
  • author
    Vandana
    22 जुलाई 2017
    तारीफ़ में लिखा कोई भी शब्द मुक़म्मल तारीफ़ नहीं कर सकता ...ख़ैर दिल के कई अहसासों को जगा गयी आपकी कहानी .....हर अहसास को बहुत ही उम्दा तरीक़े से पेश किया गया है ....शुक्रिया ...
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    Nishi Yadav
    27 सितम्बर 2018
    kabhi kabhi hum jo chahte hain..vo paa nahi sakte.. ..isi kahani par mujhe kuch yaad aa raha hai ki.... yeh sach hai ki main tumhe paana nahi chahta....yeh sach hai ki main tumhe paana nahi chahta... par usse bhi bada sach yeh hai ki main tumhe KHONA NAHI CHAHTA...
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    सौम्या झा
    09 मई 2017
    आपकी कहानी पढ़ी "विश्वास हो तुम मेरा" कुछ बड़े ही नाज़ुक ख्यालों, सवालों और जवाबों को बुनती, बड़ी प्यारी कहानी थी। न जाने क्यों एक लगाव महसूस किया ढेरों बधाइयाँ
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    Vandana
    22 जुलाई 2017
    तारीफ़ में लिखा कोई भी शब्द मुक़म्मल तारीफ़ नहीं कर सकता ...ख़ैर दिल के कई अहसासों को जगा गयी आपकी कहानी .....हर अहसास को बहुत ही उम्दा तरीक़े से पेश किया गया है ....शुक्रिया ...