pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

.विरासत की जमीनों को .

4.2
930

मेरे छत को , तुझे बादल,भिगोना भी,नहीं आता कई सदमे ,रहे आसां, जहाँ रोना भी नहीं आता रूठा रहता कई दिन से मेरे जज्बात का मासूम मेरी जानिब इधर बिकने खिलौना भी नहीं आता विरासत की जमीनो को, कहाँ रख पाते ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
सुशील यादव

जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़ रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर , कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Adhi Adhi
    12 जुलाई 2021
    बहुत ही उम्दा, बेहतरीन
  • author
    31 अगस्त 2024
    बहोत बढ़िंया
  • author
    13 जून 2019
    बेहतरीन सर जी 👌🙏🙏
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Adhi Adhi
    12 जुलाई 2021
    बहुत ही उम्दा, बेहतरीन
  • author
    31 अगस्त 2024
    बहोत बढ़िंया
  • author
    13 जून 2019
    बेहतरीन सर जी 👌🙏🙏