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वीर रस का कवि | वीर तुम बढे चलो

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वीर तुम बड़े चलो ,धीर तुम बड़े चलो , वीर रस की कविता का कर रहा था रसास्वादन । तभी श्रीमती जी आयीं , स्वभावानुसार तमतमायीं , उठो वीर ! कल शाम से पानी नहीं आया है , घर में कोई नहीं नहाया है । बाहर चौक...

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समीक्षा
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  • author
    Anup Kumar
    14 मई 2021
    डा०संगीता गांधी. द्धारा लिखित कविता"वीर रस का कवि!वीर तुम..."पढा., हास्य-व्यंग्य से भरपूर रह कविता मुझे.. बहुत ही अच्छी लगी.बहुत दिनों के बाद हास्य भरी कविता पढ़ने को मिला.,जब से पूरे देश में लोक-डाऊन लगी है मर्दों की हालत घर में रह कर क्या-झेलना पड़ता है वो तो आते दिन सुनाई और दिखाई देती है.घर में पत्नी का छत्रछाया रहती है.आज के सामाजिक परिवेश में रह कविता सटीक लगती है. डा०संगीता जी को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं. अनुप कुमार, रांची, झारखण्ड..878 935 9681.. anupkumarram198@gmail.com
  • author
    Rock n Roll
    14 मई 2021
    most useful
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    The Author
    07 मार्च 2021
    Bahut achchha lagi
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  • author
    Anup Kumar
    14 मई 2021
    डा०संगीता गांधी. द्धारा लिखित कविता"वीर रस का कवि!वीर तुम..."पढा., हास्य-व्यंग्य से भरपूर रह कविता मुझे.. बहुत ही अच्छी लगी.बहुत दिनों के बाद हास्य भरी कविता पढ़ने को मिला.,जब से पूरे देश में लोक-डाऊन लगी है मर्दों की हालत घर में रह कर क्या-झेलना पड़ता है वो तो आते दिन सुनाई और दिखाई देती है.घर में पत्नी का छत्रछाया रहती है.आज के सामाजिक परिवेश में रह कविता सटीक लगती है. डा०संगीता जी को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं. अनुप कुमार, रांची, झारखण्ड..878 935 9681.. anupkumarram198@gmail.com
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    Rock n Roll
    14 मई 2021
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    07 मार्च 2021
    Bahut achchha lagi