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विनाश काले विपरीत बुद्धि

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मेरे प्रतिलिपि के समस्त सम्मानित लेखकगण और प्रिय पाठकों सादर प्रणाम        आज अपनी व्यथा के साथ हाज़िर हूँ, पिछले कुछ महीनों से मैं प्रतिलिपि पर ज़्यादा लेखन नहीं कर सकती और  न ही ज़्यादा ...

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लेखक के बारे में
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Dr.Sabiha Rahmani

डॉक्टर सबीहा रहमानी, असिस्टेंट प्रोफेसर राज महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय बांदा, फाउंडर/प्रबंधक- चिराग़ फाउंडेशन (महिला कल्याण ) बांदा, काउंसलर फैमिली कोर्ट, पुलिस परामर्श केंद्र, साक्षरता विधिक न्यायालय, लेखिका। मुझे स्त्री विमर्श और सामाजिक सरोकारों पर कहानी,कविता और उपन्यास लिखना बहुत पसंद है। मेरा अब तक लेखन सच को आइना दिखाने के मानिंद। मेरे बारे में इतना कहूंगी- मैं एक चिराग़ हूँ, जितनी वुसअत है, उतना औरों के काम आ रहा हूँ मैं ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dr.Punam Sinha
    13 जून 2022
    मैम कुछ बात कहूंगी आप उसे अन्यथा नहीं लेंगी सबसे पहली बात की जो पीड़ा आज आप अनुभव कर रही है वहीं पीड़ा हर लेखक को होती है जब उसकी रचना कारण चाहे जो भी हो नहीं पढ़ी जाती है इसलिए हमारा आपका दायित्व है कि हम लेखक के साथ साथ पाठक भी बने रहे जहां तक समय और परिस्थितियां हैं तो हम सब के साथ है फिर भी हम समय निकालकर प्रतिदिन एक नहीं दो तीन रचनाएं लिखी डालते हैं पर उसी में से समय निकालकर नहीं सब की कुछेक की रचना नहीं पढ़ेंगे तो यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है यह कोई बदला नहीं अपितु मानव स्वभाव की कमजोरी है हर कोई बहुत मानसिक कवायद करके कुछ लिखता है अगर उसे पाठक की प्रतिक्रिया ही न मिले तो उसका हताश होना स्वाभाविक है। इसलिए मुझे तो लगता है कि हम पाठक और लेखक दोनों बने रहे तो यह समस्या आएगी ही नहीं । वैसे आजकल लिपि पर लेखकों की बाढ सी आ गयीहै हो सकता है यह उसकी प्रतिक्रिया हो जिसे हम बदला समझने की भूल कर रहे हैं।
  • author
    शकुन्तला गौतम
    13 जून 2022
    जी बिल्कुल सही बात है आपकी एक दूसरे की विशेषता को लेकर विशेष बन सकते हैं,उसी तरह किसी के प्रति नफ़रत या दुर्भावना रखने पर वैसा ही हमारा व्यक्तित्व भी बनने लगता है। आपके चिराग की रोशनी हमेशा बढ़ती रहे यही शुभकामना है 😊👌👌👍👍
  • author
    12 जून 2022
    सुंदर विचार 👌👌👌
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    Dr.Punam Sinha
    13 जून 2022
    मैम कुछ बात कहूंगी आप उसे अन्यथा नहीं लेंगी सबसे पहली बात की जो पीड़ा आज आप अनुभव कर रही है वहीं पीड़ा हर लेखक को होती है जब उसकी रचना कारण चाहे जो भी हो नहीं पढ़ी जाती है इसलिए हमारा आपका दायित्व है कि हम लेखक के साथ साथ पाठक भी बने रहे जहां तक समय और परिस्थितियां हैं तो हम सब के साथ है फिर भी हम समय निकालकर प्रतिदिन एक नहीं दो तीन रचनाएं लिखी डालते हैं पर उसी में से समय निकालकर नहीं सब की कुछेक की रचना नहीं पढ़ेंगे तो यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है यह कोई बदला नहीं अपितु मानव स्वभाव की कमजोरी है हर कोई बहुत मानसिक कवायद करके कुछ लिखता है अगर उसे पाठक की प्रतिक्रिया ही न मिले तो उसका हताश होना स्वाभाविक है। इसलिए मुझे तो लगता है कि हम पाठक और लेखक दोनों बने रहे तो यह समस्या आएगी ही नहीं । वैसे आजकल लिपि पर लेखकों की बाढ सी आ गयीहै हो सकता है यह उसकी प्रतिक्रिया हो जिसे हम बदला समझने की भूल कर रहे हैं।
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    शकुन्तला गौतम
    13 जून 2022
    जी बिल्कुल सही बात है आपकी एक दूसरे की विशेषता को लेकर विशेष बन सकते हैं,उसी तरह किसी के प्रति नफ़रत या दुर्भावना रखने पर वैसा ही हमारा व्यक्तित्व भी बनने लगता है। आपके चिराग की रोशनी हमेशा बढ़ती रहे यही शुभकामना है 😊👌👌👍👍
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    12 जून 2022
    सुंदर विचार 👌👌👌