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4.3
458

माँ.! उतारो मेरी बलायें चाचियों को सूचना दो बनाओ आज रात मीठे पकवान बहन.! आओ मेरी छाती से लग जाओ अपने आँसुओं से मुझे जुड़ाओ भौजाईयों! कनखियों से न निहारो मुझे तुम्हारा दुलारा आँचर-छोर ही हूँ ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shree Kriti
    28 अगस्त 2023
    रचना ठीक है पर भाषा पर आपको ध्यान देने की जरूरत है। कृपया मेरी कविता " काव्य- कोकिल " पर अपनी समीक्षा दर्ज करें🙏।
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    20 अक्टूबर 2015
    हादशे जैसे शब्द राष्ट्र भाषा ज्ञान दर्शा रहे हैं । नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    Savita Lal
    03 अगस्त 2020
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण 👌🏼👌🏼
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  • author
    Shree Kriti
    28 अगस्त 2023
    रचना ठीक है पर भाषा पर आपको ध्यान देने की जरूरत है। कृपया मेरी कविता " काव्य- कोकिल " पर अपनी समीक्षा दर्ज करें🙏।
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    20 अक्टूबर 2015
    हादशे जैसे शब्द राष्ट्र भाषा ज्ञान दर्शा रहे हैं । नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    Savita Lal
    03 अगस्त 2020
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण 👌🏼👌🏼