एक दर्ज़ी की कहानी जिसका हुनर बोलता था। ऐसी परिस्थितियाँ आईं कि सब कुछ ख़त्म हो गया। कालान्तर में फिर ऐसी घटनाएँ घटती हैं कि कांपते हाथों से दर्जी ने अपने इस हुनर को फिर से ज़िन्दा कर दिया।

प्रतिलिपिएक दर्ज़ी की कहानी जिसका हुनर बोलता था। ऐसी परिस्थितियाँ आईं कि सब कुछ ख़त्म हो गया। कालान्तर में फिर ऐसी घटनाएँ घटती हैं कि कांपते हाथों से दर्जी ने अपने इस हुनर को फिर से ज़िन्दा कर दिया।