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उस पार न जाने क्या होगा...?

4.8
69

इस पार प्रिय वर्षा है तुम हो,उस पार न जाने क्या होगा..? जीने की एक तुम हो आशा,आधार न  जाने क्या होगा। मदिरा के प्यालों सी छलकों, फूलों सा हो नव यौवन। ललित कल्पना हो कवि की तुम, गीतों में  हो नव सावन। ...

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लेखक के बारे में

कहाँ है मेरा मोहन,मुझे तो पता दो? अरे दुनिया वालो,कोई तो बता दो।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    13 जुलाई 2022
    वाह! बच्चन जी से भी पार पहुंच गए! इस पार प्रिये! मैं हूं तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा? अगर कुछ ना हुआ तो फिर, फिर न जाने क्या होगा?
  • author
    Suresh Upadhyay
    29 मई 2022
    ...उस पार वही होगा जो रब को मंजूर होगा .!+ नदी में नाव होगी और पतवार भी होगा ..!+ साहिल भी होगा मंजधार भी होगा ..!+
  • author
    संतोष नायक
    29 मई 2022
    बहुत ही अच्छी व लाजबाव रचना।भावनाओं की अभि व्यक्ति के लिए शब्दों का चयन बहुत ही अच्छा लगा।
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    13 जुलाई 2022
    वाह! बच्चन जी से भी पार पहुंच गए! इस पार प्रिये! मैं हूं तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा? अगर कुछ ना हुआ तो फिर, फिर न जाने क्या होगा?
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    Suresh Upadhyay
    29 मई 2022
    ...उस पार वही होगा जो रब को मंजूर होगा .!+ नदी में नाव होगी और पतवार भी होगा ..!+ साहिल भी होगा मंजधार भी होगा ..!+
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    संतोष नायक
    29 मई 2022
    बहुत ही अच्छी व लाजबाव रचना।भावनाओं की अभि व्यक्ति के लिए शब्दों का चयन बहुत ही अच्छा लगा।