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उलझा दिल - ए - सितम - ज़दा

4.1
1183

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज नाज़िल हुई बला मेरे सर पर कहाँ से आज तड़पूँगा हिज्र-ए-यार में है रात चौधवीं तन चाँदनी में होगा मुक़ाबिल कताँ से आज दो-चार रश्क-ए-माह भी हम-राह चाहिएँ वादा ...

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लेखक के बारे में
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आघा हसन
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rajni Diwakar
    23 जून 2022
    bhut sundar
  • author
    sudhakararao kommuri
    18 सितम्बर 2021
    good
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    Rajni Diwakar
    23 जून 2022
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    18 सितम्बर 2021
    good