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उड़ता पंछी

4.6
122

उड़ता पंछी हु एक दिन उड़ जाउंगी तुम्हारे लाख बुलाने पर वापस भी ना आउंगी तुम रोना धोना मचा लेना मन मर्जी हो उतना ये बंजर नाराज मैं अब और ना देख पाउंगी  तुम  बैठकर सोचते रहोगे अकेले  मेरे बारे ...

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लेखक के बारे में
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Ranu Bindoriya

अच्छा लिखने मे उम्र निकल जाती है ओर समझने मे जिन्दगी...

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Narendra Mehar "Naren"
    05 जून 2021
    behtreen rachna hai lgta hai apko kisi ne jyada hi pareshan kr diya hai isliye use chodkar jane ki bat kr rhi ho
  • author
    Shashank मणि Yadava "सनम"
    16 जुलाई 2020
    👌🏼 👌🏼 👌🏼 👌🏼 लाजवाब लाजवाब लाजवाब लाजवाब
  • author
    पियूष कुमार
    16 जुलाई 2020
    nice 😊👌👍
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  • author
    Narendra Mehar "Naren"
    05 जून 2021
    behtreen rachna hai lgta hai apko kisi ne jyada hi pareshan kr diya hai isliye use chodkar jane ki bat kr rhi ho
  • author
    Shashank मणि Yadava "सनम"
    16 जुलाई 2020
    👌🏼 👌🏼 👌🏼 👌🏼 लाजवाब लाजवाब लाजवाब लाजवाब
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    पियूष कुमार
    16 जुलाई 2020
    nice 😊👌👍