दहकते गर्म तवे से अधपकी रोटी उठाने के लिए छुहारी बाई ने अंगूठे से लगी दो ऊंगलियों को जैसे ही तवे पर रखा, मुंह से दर्दभरी सिसकारी निकली। ऊंगलियां रोटी के बजाय तवे से जा चिपकी थीं। कराहती छुहारी की ...
लेखक के बारे मे- ब्रह्मवीर सिंह : प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया में समान रूप से सक्रिय। दैनिक भास्कर भोपाल से पत्रकारिता का प्रारंभ। सहारा समय, दिल्ली एवं रायपुर, छत्तीसगढ़ में कार्यरत। वर्तमान में राष्ट्रीय दैनिक हरिभूमि, रायपुर में संपादक-समन्वयक एवं आईएनएच न्यूज छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के संपादक के उत्तरदायित्व का निर्वहन। प्रकाशित उपन्यास: दंड का अरण्य। प्रकाशित पुस्तक: अभिमत। कई कहानियां प्रकाशित हैं।
सारांश
लेखक के बारे मे- ब्रह्मवीर सिंह : प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया में समान रूप से सक्रिय। दैनिक भास्कर भोपाल से पत्रकारिता का प्रारंभ। सहारा समय, दिल्ली एवं रायपुर, छत्तीसगढ़ में कार्यरत। वर्तमान में राष्ट्रीय दैनिक हरिभूमि, रायपुर में संपादक-समन्वयक एवं आईएनएच न्यूज छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के संपादक के उत्तरदायित्व का निर्वहन। प्रकाशित उपन्यास: दंड का अरण्य। प्रकाशित पुस्तक: अभिमत। कई कहानियां प्रकाशित हैं।
समीक्षा
आपकी रेटिंग
रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
आपकी रेटिंग
रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
आपकी रचना शेयर करें
बधाई हो! उधार की दुल्हन प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।