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उड़न खटोला

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उड़न खटोले पर होकर सवार चलें आज चाँद-तारों के पार। मंगल ग्रह की सैर कर आएँ, जमीन के एक टुकड़े पर अपना नाम लिखा आएँ। एक छोटा-सा आशियाना अपना, हम वहाँ बसा आएँ। उड़न खटोले को लेकर साथ कभी ...

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लेखक के बारे में
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Rajan Kaur

मैं राजन कौर, केरला समाजम मॉडल स्कूल में उपप्रधानाचार्या एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हूँ। लेखन में हमेशा से ही मेरी रूचि रही है। व्यस्तता के कारण कभी अपने शौक को आकार नहीं दे पाई। लाॅकडाउन के दौरान घर पर रहते हुए इस शौक को थोड़ा समय दे पा रही हूँ। प्रतिलिपि. काॅम ने मुझे एक लेखिका के रूप में अपनी पहचान बनाने का आधार प्रदान किया। मुझे खुशी है कि आप मेरी रचनाओं को पसन्द कर रहे हैं। आशा है कि आगे भी इसी तरह लिखती रहूँगी और आपका प्यार मुझे मिलता रहेगा ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    undefined
    26 பிப்ரவரி 2021
    बहुत सुंदर संदेश👌 -'हमारा मन कितनी भी दूर उड़ान क्यों ना भर ले, परंतु अंत में उसे ईश्वर की शरण में आना ही पड़ता हैl' यही परम सत्य है!
  • author
    RASHMI JAIN
    25 பிப்ரவரி 2021
    काश ऐसा उड़न खटोला सब के पास होता,कम से कम सब अपने तरीके से उड़ सकते।सुन्दर प्रस्तुती। 💐💐🚀
  • author
    Abhirup Ganguly
    25 பிப்ரவரி 2021
    Very well written ma'am 👌🏻👌🏻
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    undefined
    26 பிப்ரவரி 2021
    बहुत सुंदर संदेश👌 -'हमारा मन कितनी भी दूर उड़ान क्यों ना भर ले, परंतु अंत में उसे ईश्वर की शरण में आना ही पड़ता हैl' यही परम सत्य है!
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    RASHMI JAIN
    25 பிப்ரவரி 2021
    काश ऐसा उड़न खटोला सब के पास होता,कम से कम सब अपने तरीके से उड़ सकते।सुन्दर प्रस्तुती। 💐💐🚀
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    Abhirup Ganguly
    25 பிப்ரவரி 2021
    Very well written ma'am 👌🏻👌🏻