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टूटता तारा

4.3
1077

टूट कर गगन से नीचे आ रहा था एक तारा , सुंदर नीला चमकीला लगता था बहुत प्यारा । सोचा कष्टों में ,बीत गया ये जीवन सारा, कुछ सपनों पर भी तो है अधिकार हमारा , एक पगले से अहसास ने मन को छुआ , सोचा आज ...

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लेखक के बारे में
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जाह्नवी सुमन

शिक्षा   M.Com  {Delhi University } B .Ed {MD University } प्रकाशित पुस्तकेंं  १} चंद्रमौलि शुभा का (उपन्यास ) २ }अापकी प्रतीक्षा में {उपन्यास } ३}मुस्कान एक लम्हा {हास्य व्यंग }

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    meri kalam
    10 अक्टूबर 2015
    Dil ko chhu gai.
  • author
    रेणु मिश्रा
    10 अक्टूबर 2015
    अंतिम तीन पंक्तियाँ बहुत बढ़िया। अच्छी रचना 
  • author
    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह बहुत सुन्दर | मै आपको अपनी कविता " तू कौन " पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ | धन्यवाद | https://hindi.pratilipi.com/story/तू-कौन-4GiIbMMDJuGf
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    meri kalam
    10 अक्टूबर 2015
    Dil ko chhu gai.
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    रेणु मिश्रा
    10 अक्टूबर 2015
    अंतिम तीन पंक्तियाँ बहुत बढ़िया। अच्छी रचना 
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    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह बहुत सुन्दर | मै आपको अपनी कविता " तू कौन " पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ | धन्यवाद | https://hindi.pratilipi.com/story/तू-कौन-4GiIbMMDJuGf