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"तुम ठीक हो ना?"

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तुम ठीक हो ना, मैं साथ हूँ या ना रहूँ, तुम ठीक हो ना। अच्छे बुरे हालात में, तुम ठीक हो ना। काली अंधेरी रात में, तुम ठीक हो ना। वो दबे हुए जज़्बात में, उस अनकहे अहसास में, गुज़रे हुए लम्हात में, कुछ ...

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लेखक के बारे में
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Gautam

सीख रहा हूँ, मन की बातों को शब्दों में पिरोना।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Urvii
    07 जुलाई 2021
    बहुत सुंदर पंक्तियां हैं 👌👌
  • author
    Pratibha Singh "Preeti"
    08 जुलाई 2021
    very good
  • author
    Sulakha Kumari
    07 जुलाई 2021
    👌
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  • author
    Urvii
    07 जुलाई 2021
    बहुत सुंदर पंक्तियां हैं 👌👌
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    Pratibha Singh "Preeti"
    08 जुलाई 2021
    very good
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    Sulakha Kumari
    07 जुलाई 2021
    👌