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तुम संग, तुम बिन...

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1053

तुम संग जीवन अमरस मीठा, तुम बिन पानी फीका फीका, तुम संग जीवन समरवीर सा, तुम बिन खाली तरकश जैसा । तुम संग जीवन हरित सावन है, तुम बिन उपवन उजड़ा उजड़ा, तुम संग जीवन सर्द हिमालय, तुम बिन थार मरूस्थल जैसा ...

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लेखक के बारे में

जयपुर से मैनेजमेंट में स्नातक पूर्ण कर मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर करने को दिल्ली आया, फाइनेंस और मार्केटिंग में एम. बी. ए. करने के पश्चात् मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने लगा, लेकिन रंगमंच और साहित्य के प्रति अपनी रूचि को ज़्यादा समय तक छिपाकर नहीं रख सका । रंगकर्म शुरू कर दिया, लगातार कर रहा हूँ । रंगमंच में स्नातकोत्तर भी इसी वर्ष पूरा कर चुका हूँ। कुछ-कुछ लिखने की कोशिश करता रहता हूँ, मुख्यतया लघु कहानियाँ, कवितायेँ और नाटक लिखने की कोशिशें करता हूँ, अब वो सफल हैं या असफल, ये तो आप जैसे गुणी जनों के समक्ष फैलाने से ही पता लगेगा ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sweta Pant "Seemu"
    22 दिसम्बर 2022
    Bhut hi achhi poem Can you please read my stories and poems and will be support
  • author
    uttu sharma
    17 अगस्त 2020
    excellent writing skills
  • author
    17 जनवरी 2019
    बहुत सुन्दर लिखा
  • author
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    Sweta Pant "Seemu"
    22 दिसम्बर 2022
    Bhut hi achhi poem Can you please read my stories and poems and will be support
  • author
    uttu sharma
    17 अगस्त 2020
    excellent writing skills
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    17 जनवरी 2019
    बहुत सुन्दर लिखा