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तूलिका

4.5
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“अरे...यह क्या कर रहे हो...छोड़ो न...” “कुछ नहीं...सच तो यह है कि तुम्हारी इन लटों को सुलझाना...उफ्फ जाने क्या हो जाता है मुझे तुम्हें इस रूप में देखकर…” “हटो भी...हर समय मुझे छूने का मौका ...

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लेखक के बारे में

लेखक, संपादक एवं प्रकाशक

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    13 সেপ্টেম্বর 2018
    अगर 100 star होता तो मै कसम से सब दे देता , बहुत ही दर्दनाक कहानी, और सबसे खास बात ये कि इस कहानी मे मेरे इलाहाबाद city का नाम भी आया,बहुत आभारी हूँ आपका।
  • author
    Meena Sarraf
    21 এপ্রিল 2018
    सच मे प्यार नसीब वालो को ही मिलता हैं प्यार तो बहुत लोग करते हैं बहुत ही सुन्दर व रोचक
  • author
    25 অক্টোবর 2018
    फिल्मी कहानी जैसी।बहुत सुन्दर।मेरी रचना भी पढे व बताएं मेरी कमियां।
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    13 সেপ্টেম্বর 2018
    अगर 100 star होता तो मै कसम से सब दे देता , बहुत ही दर्दनाक कहानी, और सबसे खास बात ये कि इस कहानी मे मेरे इलाहाबाद city का नाम भी आया,बहुत आभारी हूँ आपका।
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    Meena Sarraf
    21 এপ্রিল 2018
    सच मे प्यार नसीब वालो को ही मिलता हैं प्यार तो बहुत लोग करते हैं बहुत ही सुन्दर व रोचक
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    25 অক্টোবর 2018
    फिल्मी कहानी जैसी।बहुत सुन्दर।मेरी रचना भी पढे व बताएं मेरी कमियां।